सुरक्षा गार्ड की हैरानी देखने लायक थी जब वह बाहर आया। लगता है कोई बड़ा खेल चल रहा है इस इमारत के अंदर छिपकर। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मोड़ बार-बार दिलचस्प बनाते हैं दर्शकों के लिए। काले जैकेट वाले की मुस्कान में छिरा घमंड साफ झलक रहा था पर्दे पर हर पल।
भूरे सूट वाले लड़के की चोट सच्ची है या नाटक, यह तो आगे पता चलेगा पूरी तरह। पर उसकी बातों में एक अजीब सी बेचैनी साफ दिख रही थी हर पल। सुरक्षा कर्मियों का रवैया अचानक बदलना कहानी में नया मोड़ लाता है। वैद्य भी, योद्धा भी का यह भाग काफी रोमांचक रहा आज।
सफेद पोशाक में आए शख्स की एंट्री ने सबका ध्यान खींच लिया तुरंत। लगता है अब असली मालिक सामने आ गया है सबके बीच खड़ा होकर। काले कोट वाले की चुनौती अब किससे होगी यह देखना बाकी है। वैद्य भी, योद्धा भी में सत्ता का संतुलन बहुत तेजी से बदलते हैं।
इमारत के बाहर का माहौल काफी तनावपूर्ण दिखाया गया है निर्देशक ने बखूबी। हर किरदार की आंखों में कुछ छिपाने की कोशिश साफ नजर आती है। चोटिल हाथ वाला शख्स क्यों झूठ बोल रहा हो सकता है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में हर शख्स का अपना राज है।
जब वह बाहर निकला तो सुरक्षा वालों की हरकतें बदल गईं अचानक। शायद उसे पहचान गए होंगे या कोई और वजह हो सकती है पीछे। काले जैकेट वाले की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे सीन दिल पर गहरा असर छोड़ते हैं।
भूरे रंग के सूट में वह लड़का काफी मासूम लग रहा था शुरू में सबको। पर फिर उसकी बातों में चालाकी झलकने लगी धीरे धीरे सबके सामने। सफेद कपड़ों वाले की एंट्री ने सबको चौंका दिया एकदम से। वैद्य भी, योद्धा भी का हर सीन नया सवाल खड़ा करता है।
इस ड्रामे में हर मोड़ पर नया झटका मिलता है दर्शकों को लगातार। सुरक्षा गार्ड का डरना साबित करता है कि अंदर कौन है असल में। काले कोट वाले का घमंड टूटने वाला है जल्द ही। वैद्य भी, योद्धा भी में न्याय की जीत हमेशा होती है अंत में।
एक्टिंग बहुत स्वाभाविक लगी खासकर उस लड़के की जो घायल था बुरी तरह। उसकी आंखों में डर और गुस्सा दोनों साफ दिखाई दे रहे थे। पृष्ठभूमि में इमारत का नाम भी काफी शानदार लग रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी की निर्माण गुणवत्ता काफी अच्छी है।
कहानी में जब सफेद पोशाक वाला आया तो हवा का रुख बदल गया पूरी तरह। लगता है अब असली खेल शुरू होने वाला है सबके लिए यहाँ। काले जैकेट वाले को अब पछताना पड़ सकता है थोड़ा सा। वैद्य भी, योद्धा भी में बदला की आग धीरे जलती है।
कुल मिलाकर यह सीन काफी रहस्य से भरा हुआ था पूरा का पूरा। हर किरदार का अपना मकसद साफ झलक रहा था पर्दे पर। अगले भाग में क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई। वैद्य भी, योद्धा भी को देखने का मजा ही कुछ और है।