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जब तक फूल न झर जाएँवां10एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजकुमार की नज़रें और एक अजनबी का स्पर्श

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य दिल को छू लेता है। राजकुमार का गंभीर चेहरा और उस गरीब लड़की की हिम्मत देखकर लगता है कि कहानी में बड़ा मोड़ आने वाला है। बाज़ार में भागते हुए उसने राजकुमार को पकड़ लिया, और उनकी आँखों में एक अजीब सी पहचान झलकी। क्या वह कोई पुरानी याद है? नेटशॉर्ट पर ऐसे ही भावनात्मक दृश्य देखना बहुत अच्छा लगता है।