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जब तक फूल न झर जाएँवां62एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

साम्राज्ञी की आँखों में छुपा दर्द

जब तक फूल न झर जाएँ में साम्राज्ञी के चेहरे पर जो भावनात्मक तूफान दिखा, वो दिल को छू गया। राजा की निगाहें भी कुछ कह रही थीं, पर शब्द नहीं निकले। बच्चों की मासूमियत और दासी की घबराहट ने दृश्य को और गहरा बना दिया। हर फ्रेम में तनाव और अनकही कहानी छुपी है। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है जैसे खुद उस महल में खड़े हों।