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जब तक फूल न झर जाएँवां54एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंधी दुल्हन का रहस्य

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य दिल को छू लेता है। आँखों पर पट्टी बांधी दुल्हन की मासूमियत और उसके चेहरे पर उभरती मुस्कान देखकर लगता है कि वह किसी गहरे रहस्य को जानती है। परिचारिकाओं की सेवाभावना और राजकुमार का चिंतित चेहरा कहानी में तनाव पैदा करता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखना सुकून देता है, जैसे खुद उस महल में मौजूद हों।