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जब तक फूल न झर जाएँवां35एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्चों की आँखों में छिपा दर्द

जब तक फूल न झर जाएँ में बच्चों के चेहरे पर डर और समझदारी का मिश्रण देखकर दिल दहल गया। लाल पोशाक वाला बच्चा चुपचाप सब सह रहा है, जबकि छोटी बच्ची की आँखों में सवाल हैं। आग की लपटें और तलवारें माहौल को और भी तनावपूर्ण बना रही हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखते समय लगा जैसे मैं भी वहीं खड़ी हूँ, बेबस होकर सब देख रही हूँ।