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जब तक फूल न झर जाएँवां59एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंधी महारानी का बदला

जब तक फूल न झर जाएँ, यह दृश्य दिल दहला देता है! गुलाबी पोशाक वाली रानी की आँखों पर पट्टी बांधकर उसे ज़मीन पर गिराया गया, फिर जबरदस्ती दवा पिलाई गई। हरे रंग की लड़की की मुस्कान में छिपी खतरनाक चाल और नीले लिबास वाली महिला का रहस्यमयी चेहरा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बादशाह के आते ही सब बदल गया, बच्चों की मासूमियत ने माहौल को हल्का किया। यह ड्रामा नेटशॉर्ट ऐप पर देखना बेहतरीन अनुभव है, हर पल सस्पेंस से भरा हुआ है।