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जब तक फूल न झर जाएँवां51एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

पत्थर की चट्टान पर टूटा हुआ दिल

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। लाल पोशाक वाली नायिका की आँखों में जो दर्द और विद्रोह है, वह शब्दों से परे है। जब वह पत्थर तोड़ती है और फिर उस सैनिक के सामने खड़ी होती है, तो लगता है जैसे वह अपनी किस्मत से लड़ रही हो। उसकी सहेली का सहारा और वह अंतिम नज़ारा जहाँ वह चोटिल होकर गिरती है, दिल को चीर देता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना एक अलग ही अनुभव है, जो आपको कहानी से जोड़े रखता है।

जब तक फूल न झर जाएँ एपिसोड 51 - Netshort