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जब तक फूल न झर जाएँवां66एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

समय के साथ बदलते रिश्ते

जब तक फूल न झर जाएँ में एक साल बाद का दृश्य देखकर दिल खुश हो गया। राजा और रानी के बीच का प्यार और बच्चों की मासूमियत ने मन को छू लिया। बेटे की लिखावट और बेटी की पेंटिंग देखकर लगा कि परिवार में कला की धारा बह रही है। राजा का बेटे को प्रोत्साहित करना और बेटी को गले लगाना दिखाता है कि वह एक अच्छे पिता हैं। रानी का मुस्कुराता चेहरा और बच्चों की खुशी ने इस दृश्य को और भी खास बना दिया।