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जब तक फूल न झर जाएँवां25एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बारिश में टूटा दिल और बिस्तर पर संभाली उम्मीद

जब तक फूल न झर जाएँ का ये सीन दिल को छू गया। बारिश में घुटनों के बल गिरी लड़की की आँखों में वो दर्द था जो शब्दों से बयान नहीं होता। वहीं कमरे में पट्टी बांधे हाथ को सहलाता युवक, उसके चेहरे पर ममता और चिंता का मिश्रण साफ दिख रहा था। बच्ची का पीछे खड़ा होना और सब कुछ चुपचाप देखना मासूमियत की दीवार बन गया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल मोमेंट्स देखकर लगता है जैसे कहानी हमारे बीच जी रही हो। हर फ्रेम में एक नया एहसास।