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जब तक फूल न झर जाएँवां56एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

नीले परिधान में मासूमियत और लाल पोशाक में दबदबा

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य सच में दिलचस्प है। हल्के नीले परिधान वाली नायिका की उत्सुकता और चमकती आंखें देखकर लगता है जैसे उसने कोई खजाना ढूंढ लिया हो। मोतियों की मालाएं और शीशे में उसका प्रतिबिंब बहुत सुंदर लग रहा है। लेकिन जैसे ही पर्दा हटता है और लाल पोशाक में सजी रानी का प्रवेश होता है माहौल एकदम गंभीर हो जाता है। दोनों के बीच की चुप्पी और नजरों का टकराव बता रहा है कि अब कहानी में बड़ा मोड़ आने वाला है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ही रोमांचक पल देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं।