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जब तक फूल न झर जाएँवां53एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुस्से में भी छुपा है प्यार

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य दिल को छू लेता है। बूढ़े आदमी की चिंता और लड़की का डर साफ दिख रहा है। सैनिकों का झुकना और फिर गुस्सा सब कुछ इतना असली लगता है जैसे हम वहीं खड़े हों। पहाड़ी इलाके की हवा और धूल भी कहानी का हिस्सा बन गई है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि हर पल में कुछ नया है।