जब तक फूल न झर जाएँ में वह दृश्य जहाँ नायक घोड़े से कूदकर नायिका को बचाता है, रोंगटे खड़े कर देने वाला है। चट्टान के किनारे खड़ी वह मासूम बच्ची और घायल माँ की चीखें दिल को चीर देती हैं। विलासिनी महिला की क्रूर मुस्कान और नायक का वह पागलपन भरा सफर देखकर लगता है कि प्रेम की खातिर इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीन देखते वक्त सांसें थम सी गई थीं।