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जब तक फूल न झर जाएँवां14एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुस्से से भरा हुआ बदला

जब तक फूल न झर जाएँ, इस दृश्य में दर्द और क्रोध का मिश्रण देखकर रोंगटे खड़े हो गए। एक मासूम लड़की को इतनी बेरहमी से सजा देना किसी इंसान को भी झकझोर देगा। जब वह राजकुमार दौड़ता हुआ आता है और उसकी आँखों में बदले की आग होती है, तो लगता है कि अब न्याय होगा। बच्चों का रोना और माँ की पीड़ा दिल को चीर देती है। यह दृश्य सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक तूफान है जो दर्शक को बांधे रखता है।