ग्रेसन और पर्सी के बीच का रिश्ता बहुत जटिल है। पैसे के लिए भाई भी दुश्मन बन सकते हैं। जब पर्सी ने कार तोड़ी थी, तब ग्रेसन की आँखों में डर साफ दिख रहा था। अब मेरी बारी है में ऐसे ही मोड़ देखने को मिलते हैं। रसोई में सिगार पीते हुए पर्सी का अहंकार साफ झलकता है। अंत में ग्रेसन की हालत देखकर दिल दुखी हो गया। सच्ची दोस्ती पैसों से ऊपर होनी चाहिए।
पर्सी का घमंड देखकर गुस्सा आता है। उसने ग्रेसन को सिर्फ इस्तेमाल किया। शुरुआत में लगता था कि दोनों पार्टनर हैं, पर असलियत कुछ और ही निकली। अब मेरी बारी है की कहानी बहुत असली लगती है। जब ग्रेसन ने सब्जी मंडी में पैसे गिने, तब समझ आया कि वह कितना गिर चुका है। पर्सी की पार्टी और ग्रेसन की सड़क, यह अंतर बहुत तेज था।
रसोई का माहौल और पैसे का लेनदेन सब कुछ शक पैदा करता है। ग्रेसन ने मेहनत की पर फल पर्सी ने खाया। वह लाल कार तोड़ने वाला दृश्य बहुत तनावपूर्ण था। अब मेरी बारी है में नाटक ऐसे ही होना चाहिए। ग्रेसन का हुडी पहनकर बारिश में खड़ा होना बहुत भाुक था। क्या वह वापसी कर पाएगा? यह सवाल मन में बना रहता है।
पर्सी का सीधा प्रसारण और ग्रेसन की चुप्पी, दोनों के बीच जमीन आसमान का फर्क है। एक शोहरत में है तो दूसरा संघर्ष में। अब मेरी बारी है ने दिखाया कि सफलता कैसे इंसान को बदल देती है। ग्रेसन ने जब फोन पर बात की, तो उसकी आवाज़ में दर्द था। यह शृंखला देखकर रिश्तों की अहमियत समझ आती है।
रेस्टोरेंट का नाम बदलना और पुरानी यादें मिटाना, पर्सी की फितरत को बताता है। ग्रेसन ने जब समझौता किया, तब शायद उसे धोखा नहीं पता था। अब मेरी बारी है की पटकथा बहुत मजबूत है। अंत में जब ग्रेसन ने सूट वाले व्यक्ति से हाथ मिलाया, तो उम्मीद जगी। क्या यह नई शुरुआत है? देखने वालों को यह पसंद आएगा।
पैसे की गड्डी देखकर लगता था सब ठीक है, पर असलियत कड़वी थी। पर्सी ने भाई को ही नीचा दिखाया। ग्रेसन की आँखों में आंसू और चेहरे पर पसीना साफ दिख रहा था। अब मेरी बारी है में ऐसे ही भाुक पल होते हैं। जब वह रेस्टोरेंट के बाहर खड़ा था, तो अंदर की पार्टी उसकी तकलीफ बढ़ा रही थी। बहुत ही दमदार दृश्य था।
सिगार पीते हुए पर्सी का अंदाज बहुत घमंडी था। ग्रेसन चुपचाप सब सहता रहा, पर अंदर से टूट रहा था। अब मेरी बारी है की वजह से मैंने यह कार्यक्रम देखा और मुझे पसंद आया। सब्जी खरीदते वक्त ग्रेसन की हालत देखकर तरस आया। क्या मेहनत का फल हमेशा नहीं मिलता? यह सवाल बार-बार उठता है।
भाईचारे में दरारें पैसे की वजह से आईं। पर्सी को लगा वह सब कुछ खरीद सकता है। ग्रेसन का संघर्ष बहुत असली लगा। अब मेरी बारी है में कहानी का प्रवाह बहुत अच्छा है। जब ग्रेसन ने हुडी में फोन किया, तो लगा अब वह कुछ योजना बना रहा है। अंत का मोड़ देखने लायक था। हर कड़ी में नया मोड़ है।
रेस्टोरेंट की सजावट और भीड़ के बीच ग्रेसन अकेला महसूस होता है। पर्सी की जीत और ग्रेसन की हार, यह कहानी बहुत गहराई से जुड़ी है। अब मेरी बारी है ने दिल को छू लिया। जब उसने किराये का नोटिस देखा, तो स्थिति की गंभीरता समझ आई। क्या वह फिर से रसोइया बन पाएगा? यह उम्मीद बनी रहती है।
अमीरी और गरीबी का फर्क इस कार्यक्रम में बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। पर्सी की पार्टी और ग्रेसन की भीगी हुई हुडी। अब मेरी बारी है का अंत बहुत दमदार था। ग्रेसन ने जब सूट वाले व्यक्ति से हाथ मिलाया, तो लगा कहानी पलटने वाली है। ऐसे ही रहस्य के लिए यह कार्यक्रम देखना चाहिए। बहुत ही शानदार प्रस्तुति है।
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