शादी के मंडप में बीच समारोह के फोन चेक करना कितना अजीब और तनावपूर्ण लगता है किसी को। दूल्हे की घबराहट साफ दिख रही थी जब उसने उन अजीब संदेश को पढ़ा और देखा। क्या वह किसी को ब्लॉक कर रहा था या बचाने की कोशिश कर रहा था यह समझना मुश्किल था। यह दृश्य एब मेरी बारी है में बहुत ही गहरा असर छोड़ गया और सोचने पर मजबूर कर दिया। फूलों से सजी गिरजाघर की खूबसूरती के बीच यह रहस्य और भी गहरा लग रहा था। दर्शक के रूप में मैं हैरान रह गई कि आखिर बात क्या थी जो इतनी जरूरी थी। अंत में आतिशबाजी ने सब ठीक कर दिया पर सवाल बाकी हैं।
दुल्हन की सादगी और दूल्हे की व्यस्तता के बीच का कंट्रास्ट कमाल का था और दिल को छू गया। सब लोग तालियां बजा रहे थे पर उसका ध्यान पूरी तरह पर्दे पर था। एब मेरी बारी है ने रिश्तों की इस जटिलता को बहुत बारीकी से दिखाया है। अंगूठी पहनाते वक्त उसके हाथ कांप रहे थे या बस मेरा वहम था यह समझना मुश्किल था। खैर, यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी देखना बहुत दिलचस्प होगा। ऐप पर देखने का अनुभव भी बहुत सुगम और रोमांचक रहा है।
बाहर खड़ी आलीशान कारों ने शुरू में ही रौब झांक दिया था और माहौल बना दिया था। अंदर का माहौल भी वैसा ही शाही और भव्य था। पर कहानी में वह ट्विस्ट जब उसने फोन निकाला, सबकी सांसें रुक गईं। एब मेरी बारी है की यह कड़ी सच में यादगार बन गई है। पादरी साहब भी हैरान रह गए होंगे इस हरकत से। आखिर प्यार में ऐसा कौन सा राज छिपा था जो शादी के वक्त सामने आया। यह दृश्य बहुत ही अनोखा था।
संदेश में बचाओ लिखा था, यह देखकर रोंगटे खड़े हो गए और डर लगने लगा। क्या दूल्हे पर कोई खतरा था या यह कोई नाटक था जो रचा गया था। एब मेरी बारी है में ऐसे रहस्य बनाए रखना आसान नहीं है पर यह जंचा। दुल्हन की मासूमियत देखकर दिल दुखा कि उसे कुछ पता नहीं चला। खैर, शादी तो हो गई पर क्या यह शुरूआत सही है। यही सोचकर मैं अगली कड़ी देखूंगी और इंतजार करूंगी।
गिरजाघर की ऊंची छत और रंगीन शीशे की खिड़कियां बहुत सुंदर और पवित्र लग रही थीं। सूरज की किरणें सीधे जोड़े पर पड़ रही थीं। पर दूल्हे का व्यवहार कुछ अलग और संदेहपूर्ण था। एब मेरी बारी है ने दिखाया कि बाहर से सब कुछ सही लग सकता है पर अंदर क्या चल रहा है कोई नहीं जानता। संपर्क अवरोधित करना बड़ा फैसला था उस पल में। यह दृश्य बहुत ही गहरा था।
मेहमानों की खुशी देखकर लग रहा था सब कुछ ठीक है और सब खुश हैं। सब तालियां बजा रहे थे और मुस्कुरा रहे थे। पर दूल्हे की आंखों में एक अलग ही चमक और चिंता थी। एब मेरी बारी है की कहानी बहुत गहरी और प्रभावशाली है। उसने फोन जेब में रखा और फिर अंगूठी पहनाई। यह क्षण हमेशा के लिए यादगार बन गया। आतिशबाजी ने जश्न का माहौल बना दिया।
प्रतिज्ञा के वक्त फोन देखना कितना अनुचित और अजीब लगता है किसी को। शायद उसे लगा यह जरूरी है और रुक नहीं सकता। पर दुल्हन का चेहरा देखकर लगा वह सब समझ गई हो। एब मेरी बारी है में भावनाओं को शब्दों से ज्यादा चेहरों पर दिखाया गया है। पादरी की आवाज गूंज रही थी और बीच में फोन की सूचना। यह टकराव बहुत तेज था और दिलचस्प था।
अंगूठी पहनाते वक्त कैमरा निकट दृश्य बहुत खूबसूरत और रोमांटिक था और दिल को छू गया। हीरा चमक रहा था और हाथ कांप रहे थे। क्या यह डर था या खुशी का असर था यह पता नहीं चला। एब मेरी बारी है ने इन छोटे विवरण को बहुत अच्छे से पकड़ा है और दिखाया है। शादी के बाद की जिंदगी कैसी होगी यह तो वक्त बताएगा। पर इस वक्त बस यही दिखा कि उन्होंने एक दूसरे को स्वीकार कर लिया और आगे बढ़े।
शहर के ऊपर आतिशबाजी का नजारा देखकर मन खुश हो गया और राहत मिली। लगता है सब ठीक हो गया और खत्म हुआ। पर वह फोन वाला सीन दिमाग से नहीं जा रहा है। एब मेरी बारी है में ऐसे अनिश्चित अंत छोड़ना दर्शकों को बांधे रखता है। दूल्हे ने जेब से फोन निकाला और फिर वापस रख दिया। यह छोटी हरकत बड़ी कहानी कह गई। यह अंत बहुत ही शानदार था।
यह शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं लग रहा था बल्कि कुछ और था। इसके पीछे कुछ और भी था और राज थे। दूल्हे की घबराहट और फिर शांत हो जाना। एब मेरी बारी है ने दिखाया कि प्यार में त्याग और राज दोनों होते हैं। दुल्हन की सफेद पोशाक और दूल्हे का काला सूट बहुत जच रहा था। अंत में चुंबन ने सबको हैरान कर दिया। यह कहानी बहुत ही अनोखी है।
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