इस सीन में तनाव इतना बढ़ गया कि सांस रुक सी गई। वेटर के चेहरे पर पसीना साफ दिख रहा था और फिर भी उसे वो दबाव झेलना पड़ा। सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद हालात और बिगड़ गए। पुलिस की एंट्री ने तो जैसे आग में घी डाल दिया। अब मेरी बारी है देखकर लगा कि न्याय मिलेगा या नहीं। अंत में जो हुआ वो किसी को उम्मीद नहीं थी। सच में ड्रामा अपने चरम पर था और दर्शक हैरान रह गए।
भोजनालय का माहौल शुरू में बहुत क्लासी लग रहा था लेकिन फिर वो सुशी परोसते ही सब बदल गया। ग्राहकों के चेहरे पर घृणा साफ झलक रही थी। बुजुर्ग आदमी का गुस्सा बिल्कुल जायज था। ऐसे में वेटर का बचना नामुमकिन लग रहा था। अब मेरी बारी है में ऐसे ट्विस्ट देखने को मिलते हैं जो रोंगटे खड़े कर दें। खाने में मक्खियां और फिर उल्टी करना बहुत ही ग्राफिक और डरावना था।
उस बुजुर्ग व्यक्ति की आंखों में जो गुस्सा था वो लाजवाब था। उसने जिस तरह उंगली उठाई, हर कोई डर गया। वेटर बेचारा कुछ बोल भी नहीं पा रहा था। पुलिस वाले जब आए तो लगा अब सब खुल जाएगा। अब मेरी बारी है में ऐसे सीन बार बार दिमाग में आते हैं। अंत में खून की उल्टी देखकर तो हिल कर रह गए सब। सच में बहुत तनावपूर्ण और चौंकाने वाला माहौल था।
फोन की स्क्रीन पर टिप्पणियां देखकर लगा कि आज के समय में सब कुछ कितना जल्दी प्रसारित हो जाता है। लोगों ने बिना जाने ही फैसला सुना दिया। वेटर की बेचारी हालत देखकर दिल दुखा। अब मेरी बारी है में दिखाया गया कि कैसे लोगों का फैसला काम करता है। भोजनालय की बदनामी एक पल में हो गई। ये सीन बहुत ही वास्तविक और करीब लगा मुझे।
जब पुलिस अंदर आई तो माहौल में सन्नाटा छा गया। वेटर को घेर लिया गया और उसे वो खाना पड़ा जो उसने परोसा था। ये सजा बहुत कड़ी लग रही थी। अब मेरी बारी है में ऐसे न्याय की उम्मीद नहीं थी। जोड़े ने भी हैरानी से सब देखा। अंत में जो हुआ वो बहुत ही दर्दनाक था। काश वेटर अपनी सफाई दे पाता और सच सामने आता।
वो जोड़ा जो कोने में खड़ा था, उनके चेहरे के भाव देखने लायक थे। वे कुछ कर भी नहीं सकते थे। बस सब कुछ चुपचाप होते हुए देख रहे थे। अब मेरी बारी है में ऐसे गवाहों की भूमिका बहुत अहम होती है। भोजनालय के मालिक का रवैया बहुत घमंडी लगा। वेटर के साथ जो हुआ वो अन्याय था। सच में बहुत बुरा और दुखद लगा।
अंत में वेटर ने जब खून की उल्टी की तो पूरा कमरा सन्न रह गया। ये सीन बहुत ही ज्यादा तीव्र था। शायद खाने में सच में कुछ गड़बड़ थी। अब मेरी बारी है में ऐसे मोड़ कहानी को नया दिशा देते हैं। पुलिस भी हैरान रह गई। ये सिर्फ एक भोजन नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश लग रही थी। बहुत ही हैरान करने वाला और डरावना अंत था।
इतने बड़े भोजनालय में ऐसा होना किसी को यकीन नहीं आ रहा था। कर्मचारी की गलती या फिर कोई साजिश, सब कुछ उलझन भरा था। अब मेरी बारी है में हर कड़ी में नया सच सामने आता है। वेटर की आंखों में डर साफ दिख रहा था। बुजुर्ग आदमी ने सही किया जो शोर मचाया। वरना सब चुपचाप खा जाते और बीमार पड़ते।
बेचारा वेटर क्या करता, ऊपर से मालिक का दबाव और नीचे से पुलिस। उसे जबरदस्ती वो सुशी खानी पड़ी। उसका चेहरा पसीने से तर था। अब मेरी बारी है में ऐसे पात्रों पर तरस आता है। शायद वो भी किसी के फंसाने का शिकार था। जो भी हो, ये रात किसी के लिए भी अच्छी नहीं रही। बहुत ही दुखद और दिल दहला देने वाला सीन था।
पूरा सीन एक महासंग्राम जैसा लग रहा था। हर कोई किसी न किसी से नाराज था। माहौल में तनाव को काटा जा सकता था। अब मेरी बारी है ने फिर से साबित कर दिया कि वो शानदार सामग्री बनाते हैं। अंत में जो हुआ वो किसी सजा से कम नहीं था। सबक मिल गया सबको। बहुत ही यादगार कड़ी रहा ये और हमेशा याद रहेगा।
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