सड़क पर चलते हुए उस जोड़े का कॉन्फिडेंस देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दोनों तरफ खड़े लोग सलामी दे रहे हैं जैसे कोई राजा आ रहा हो। अब मेरी बारी है में ऐसा सीन देखकर लगता है कि असली ताकत क्या होती है। बीज रंग का कोट पहने शख्स की आंखों में एक अलग ही चमक है जो दुश्मनों को डराने के लिए काफी है। यह दृश्य सिर्फ चलना नहीं बल्कि अपनी जीत का ऐलान है। हर कदम पर गरिमा झलकती है।
घायल हालत में पड़े उस शख्स को देखकर दिल दहल गया। दो लोग उसे घसीट रहे हैं और वह मदद के लिए चीख रहा है। अब मेरी बारी है की कहानी में यह मोड़ बहुत ही दर्दनाक है। सफेद सूट वाले व्यक्ति का रवैया बता रहा है कि यहां कानून नहीं ताकत चलती है। कूड़ेदान के पास का यह सीन बहुत ही गहरा असर छोड़ता है और दर्शकों को झकझोर देता है। बेचारे की हालत देखकर रोना आता है।
काली ड्रेस वाली लड़की और बीज कोट वाले शख्स का साथ देखकर लगता है कि ये दोनों किसी मुसीबत से लड़ने के लिए तैयार हैं। अब मेरी बारी है में उनके रिश्ते की गहराई इसी चलने के अंदाज से झलकती है। पीछे खड़े लोग सिर्फ तमाशबीन नहीं बल्कि गवाह हैं। सूरज की रोशनी में यह दृश्य बहुत ही सिनेमैटिक लग रहा है और दिल को छू लेता है। उनकी पकड़ मजबूत है।
सड़क के दोनों ओर खड़ी भीड़ का सन्नाटा सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है। सब चुपचाप खड़े हैं और उस जोड़े को जाने दे रहे हैं। अब मेरी बारी है में इस तरह का सम्मान आसानी से नहीं मिलता। पीछे छूटे हुए लोग शायद अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यह पावर गेम बहुत ही दिलचस्प तरीके से दिखाया गया है और कहानी में जान डालता है। सन्नाटा चीख रहा है।
फलों की टोकरी लिए बुजुर्ग महिला का चेहरा बहुत कुछ कह रहा है। शायद वह भी इस खेल का हिस्सा हैं या बस एक गवाह। अब मेरी बारी है में हर किरदार की अपनी एक कहानी है। उसकी आंखों में उम्मीद और डर दोनों दिखाई दे रहे हैं। ऐसे छोटे-छोटे संकेत कहानी को आगे बढ़ाते हैं और दर्शकों को बांधे रखते हैं। यह बारीकी बहुत ही कमाल की है। सेब और संतरे भी गवाह हैं।
सफेद सूट पहने व्यक्ति की क्रूरता देखकर गुस्सा आता है। वह घायल शख्स को बिना किसी रहम के पकड़े हुए है। अब मेरी बारी है में विलेन का यह रूप बहुत ही खतरनाक लग रहा है। उसकी पकड़ मजबूत है और चेहरे पर कोई दया नहीं है। यह सीन बताता है कि आगे क्या होने वाला है और कितना खतरा है। निष्ठुरता की हद हो गई है।
सी मिस्ट बिल्डिंग का नाम देखकर लगता है कि यह कोई होटल नहीं बल्कि किसी राज का गढ़ है। अब मेरी बारी है में यह जगह बहुत अहम भूमिका निभाने वाली है। जोड़ा हाथ पकड़कर अंदर जा रहा है जैसे कि अब उनकी बारी आ गई है। बाहर का नज़ारा और अंदर का रहस्य दोनों ही दिलचस्प हैं और उत्सुकता बढ़ाते हैं। दरवाजा बंद होते ही खेल शुरू।
घायल शख्स की आंखों में आंसू और चीख देखकर बुरा लग रहा है। वह कुछ कहना चाह रहा है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अब मेरी बारी है में इस किरदार के साथ बहुत ही ज्यादती हुई है। उसकी हालत देखकर लगता है कि बदला लेने का वक्त आ गया है। यह दर्दनाक दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा और दिल पर असर करेगा। न्याय की उम्मीद बाकी है।
शाम का सूरज और लंबी परछाइयां इस दृश्य को एक अलग ही मूड दे रही हैं। अब मेरी बारी है की सिनेमेटोग्राफी बहुत ही शानदार है। बीज कोट वाले शख्स का चलना किसी हीरो से कम नहीं लग रहा है। रोशनी का खेल और छायांकन बहुत ही बारीकी से किया गया है। यह दृश्य बहुत ही खूबसूरत और प्रभावशाली है और आंखों को सुकून देता है। सुनहरी धूप सब कुछ बदल देती है।
अंत में जब वह जोड़ा अंदर जाता है तो लगता है कि असली खेल अब शुरू होगा। अब मेरी बारी है का यह एपिसोड बहुत ही क्लाइमेक्स वाला है। पीछे छूटे हुए लोग और घसीटा गया शख्स सब कुछ बदलने का संकेत दे रहे हैं। अब देखना यह है कि अंदर क्या होने वाला है और कौन जीतेगा। पर्दा गिरने वाला है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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