इस दृश्य में भावनाओं का ऐसा भंवर है कि देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब वह युवक घुटनों पर गिरकर माफ़ी मांग रहा था, तब लगा कि शायद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन फिर उस कागज़ ने सब बदल दिया। पेंशन ट्रांसफर का वो दस्तावेज़ देखकर पिता का गुस्सा फूट पड़ा। एब मेरी बारी है में ऐसे मोड़ ही कहानी को रोचक बनाते हैं। बारिश में बाहर फेंका जाना किसी सज़ा से कम नहीं था।
कितनी आसानी से रिश्तों को कागज़ों के टुकड़ों से तोड़ दिया गया। वो दूसरा लड़का जब दरवाज़े से अंदर आया, तो उसकी चाल में ही घमंड साफ़ झलक रहा था। बुज़ुर्ग दंपत्ति की बेबसी देखकर दिल दुखी हो गया। क्या पैसा इंसानियत से बड़ा हो गया है? इस शो एब मेरी बारी है ने दिखाया कि लालच कैसे परिवार को निगल जाता है। अंत में वो चीखें अभी भी कानों में गूंज रही हैं।
लाठी थामे उस पिता का गुस्सा जायज़ था। अपने ही बेटे से ऐसा धोखा मिलेगा किसी ने नहीं सोचा था। जब उसने कागज़ फाड़े और हमला किया, तो लगा कि अब सब खत्म हो गया। माँ की आँखों में आँसू और बेटे की चीखें। एब मेरी बारी है की ये कहानी हमें सिखाती है कि भरोसा टूटने पर क्या होता है। बारिश का वो सीन बहुत ही दर्दनाक था और दिल को झकझोर दिया।
जब उसे बाहर बारिश में फेंका गया, तो लगा जैसे कुदरत भी उसके हाल पर रो रही हो। कीचड़ में सना वो चेहरा और आँखों में बदले की आग। क्या वो वापस आएगा? इस सवाल ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। एब मेरी बारी है के हर एपिसोड के बाद एक नया सवाल खड़ा हो जाता है। उस दूसरे लड़के की चालाकी देखकर गुस्सा आ रहा था और बेचैनी बढ़ रही थी।
उस माँ को देखकर बहुत तरस आया। दोनों बेटों के बीच वो फंस गई थी। एक रो रहा था और दूसरा हुकूमत चला रहा था। जब उसने अपने बेटे को गले लगाया, तो लगा कि ममता अभी भी ज़िंदा है। एब मेरी बारी है में महिला किरदारों को बहुत गहराई से दिखाया गया है। उसकी चुप्पी सबसे ज़्यादा शोर मचा रही थी और दर्द बयां कर रही थी।
अंत में जब उसने गुस्से में उंगली उठाई, तो साफ़ था कि ये कहानी यहीं खत्म नहीं होगी। बदले की आग उसकी आँखों में साफ़ दिख रही थी। क्या वो वापस आएगा और सबका हिसाब चुकता करेगा? एब मेरी बारी है के ऐसे क्लिफहैंगर्स दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसकी चोट और गीले कपड़े उसकी तकलीफ़ बयां कर रहे थे और गुस्सा बढ़ा रहे थे।
पेंशन ट्रांसफर का वो लेटर सबकी नींद उड़ा सकता है। कैसे एक दस्तखत से पूरी ज़िंदगी बदल जाती है। वो बुज़ुर्ग व्यक्ति जब कागज़ पढ़ रहा था, तो उसके हाथ कांप रहे थे। एब मेरी बारी है में ऐसे सामाजिक मुद्दों को भी छूया गया है। क्या कानून कमज़ोरों के लिए है? ये सवाल हर किसी के मन में आता है और चिंता बढ़ाता है।
काले कोट वाला वो लड़का कौन था? उसकी एंट्री ने सब कुछ पलट दिया। वो सिर्फ़ कागज़ नहीं लाया था, वो तूफान लेकर आया था। उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। एब मेरी बारी है में विलेन किरदार भी बहुत प्रभावशाली होते हैं। उसने कैसे सबको कंट्रोल किया, ये देखना दिलचस्प था और हैरान करने वाला था।
वो घर कभी खुशियों का घर होगा, अब वहां सिर्फ़ शोर और गुस्सा है। सीढ़ियां और सोफा सब गवाह हैं इस तमाशे के। जब परिवार ही बिखर जाए तो सहारा कौन देगा? एब मेरी बारी है ने दिखाया कि अमीरी में भी गरीबी हो सकती है। उस पिता की लाठी अब सहारे नहीं गुस्से की निशानी बन गई थी और डर पैदा कर रही थी।
हर किरदार की आँखों में आंसू थे, चाहे वो रो रहा हो या गुस्से में हो। उस युवक की चीखें बारिश में दब गईं लेकिन दर्द बाकी बचा। क्या कोई सुनेगा उसकी फरियाद? एब मेरी बारी है की कहानी दिल को छू लेती है। मुझे लगता है कि अगले एपिसोड में कुछ बड़ा होने वाला है और रोमांच बढ़ने वाला है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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