उस गंदे सूट वाले व्यक्ति की हालत देखकर दिल दुख गया। उसने बहुत भीख मांगी लेकिन सफेद सूट वाले ने कोई मदद नहीं की। अब मेरी बारी है में यह दृश्य बहुत भावुक है। कार का पानी छलकना जैसे अंतिम अपमान था। गली का माहौल भी बहुत डरावना लग रहा था। बारिश के बाद की गंदगी ने कहानी को और गहरा बना दिया। मुझे लगा कि वह व्यक्ति पहले अमीर रहा होगा। अब वह क्या करेगा यह देखना बाकी है।
सफेद कार का एंट्री बहुत शानदार था। गंदी गली में इतनी महंगी गाड़ी देखकर हैरानी हुई। अंदर बैठे व्यक्ति का चेहरा बिल्कुल भावहीन था। अब मेरी बारी है की कहानी में यह अमीरी और गरीबी का फर्क साफ दिखता है। जब गाड़ी ने कीचड़ उछाला तो मुझे गुस्सा आया। क्यों किसी के साथ ऐसा व्यवहार किया गया? यह सवाल मन में रह गया। क्या यह बदला है?
गिरते हुए व्यक्ति को उठाने के बजाय उन्होंने गाड़ी आगे बढ़ा दी। यह क्रूरता देखकर रोंगटे खड़े हो गए। अब मेरी बारी है में ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। खिड़की पर हाथ मारते हुए वह व्यक्ति चीख रहा था। लेकिन अंदर वाले ने खिड़की भी नहीं खोली। यह शक्ति का दुरुपयोग लगता है। काश कोई उसकी मदद करता। यह दृश्य बहुत भारी था।
बादलों का दृश्य शुरू में ही बता रहा था कि कुछ बुरा होने वाला है। मौसम का मिजाज कहानी के मूड के साथ मेल खाता था। अब मेरी बारी है में सिनेमेटोग्राफी बहुत अच्छी है। कचरे के डिब्बे और गंदे पानी ने यथार्थवाद जोड़ा। ट्रेंच कोट वाले व्यक्ति की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उसकी आंखों में कोई दया नहीं थी। यह बहुत निराशाजनक था।
भीख मांगने वाले की आंखों में आंसू साफ दिख रहे थे। वह टूट चुका था लेकिन उम्मीद अभी भी बाकी थी। अब मेरी बारी है में अभिनय बहुत लाजवाब है। जब गाड़ी चली गई तो वह वहीं खड़ा रह गया। जैसे उसकी दुनिया खत्म हो गई हो। यह दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा। ऐसी कहानियां समाज को आईना दिखाती हैं। मुझे रोना आ गया था।
सफेद सूट वाला व्यक्ति बहुत घमंडी लग रहा था। उसने नीचे देखकर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अब मेरी बारी है में किरदारों की गहराई है। गली की दीवारों पर ग्राफिटी भी कहानी कह रही थी। लगता है यह बदले की कहानी हो सकती है। जो व्यक्ति आज गिरा है, कल वही ऊपर हो सकता है। यह चक्र चलता रहता है। समय सब बदल देता है।
कार का नंबर प्लेट बहुत खास लग रहा था। शायद इसका कोई मतलब होगा। अब मेरी बारी है में छोटी चीजों पर भी ध्यान दिया गया है। जब पहिया कीचड़ में घूमा तो पानी उछलकर उस पर गिरा। यह जानबूझकर किया गया लगता था। इतनी नफरत क्यों? यह जानने के लिए मैं अगला एपिसोड देखूंगा। रहस्य बना हुआ है।
अंधेरी गली और चमकदार गाड़ी का कंट्रास्ट बहुत अच्छा था। रोशनी और छाया का खेल देखने लायक था। अब मेरी बारी है की विजुअल क्वालिटी शानदार है। भीख मांगने वाले के कपड़े फटे हुए थे। उसकी हालत देखकर तरस आ रहा था। लेकिन अमीर लोगों को शायद इससे फर्क नहीं पड़ता। यह कड़वा सच है। दिल दुखी हो गया।
जब उसने कार के शीशे पर हाथ रखा तो लगा कि वह मदद मांग रहा है। लेकिन अंदर वाले ने मुंह भी नहीं मोड़ा। अब मेरी बारी है में भावनात्मक पल बहुत हैं। यह उदासीनता सबसे बड़ी सजा है। पैसे वाले लोग अक्सर गरीबों को नहीं देखते। यह दृश्य उसी कड़वी सच्चाई को दिखाता है। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आई। बहुत प्रभावशाली है।
अंत में जब गाड़ी दूर चली गई तो सन्नाटा छा गया। वह व्यक्ति वहीं खड़ा रहा जैसे पत्थर का बुत हो। अब मेरी बारी है का यह एपिसोड बहुत प्रभावशाली था। बारिश का पानी और आंसू एक हो गए थे। यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है। क्या इंसानियत मर गई है? यह सवाल हर किसी के मन में आता है। जवाब मिलना बाकी है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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