इस दृश्य में जब तीन गुंडे उस बेचारे बूढ़े व्यक्ति को गली में पीट रहे थे, तो दिल बहुत दुखा। फिर अचानक वह शानदार सफेद कार आई और सब कुछ बदल गया। नायक ने बिना कुछ कहे गुंडे का हाथ तोड़ दिया। यह कार्यवाही देखकर रोंगटे खड़े हो गए। अब मेरी बारी है का यह दृश्य सच में दिल को छू लेता है। अमीर व्यक्ति ने न केवल बदला लिया बल्कि बूढ़े की मदद भी की। काश हर जगह ऐसे इंसान मिलें। यह कहानी बहुत गहरी है।
उस गंदी गली में जब वह चमकदार गाड़ी आई तो नज़ारा देखने लायक था। गुंडे डर के मारे भागने लगे। नायक की शांत चाल और आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। उसने उस बूढ़े भिखारी को उठाया और कागज थमा दिया। यह कहानी बताती है कि इंसानियत अभी ज़िंदा है। अब मेरी बारी है में ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं। नेटशॉर्ट मंच पर यह श्रृंखला देखना बहुत अच्छा लगा।
जब नायक ने उस गुंडे की कलाई पकड़ी, तो मुझे लगा अब इसका खेल खत्म। गुंडे के चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा था। वह चीख रहा था लेकिन कोई मदद नहीं आई। नायक ने बहुत ही ठंडे दिमाग से सबको सबक सिखाया। यह बदले की आग बहुत तेज थी। अब मेरी बारी है की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। बूढ़े आदमी की आंखों में आंसू देखकर बुरा लगा।
नायक ने जेब से कागज निकाला और बूढ़े आदमी को दे दिया। शायद यह कोई जायदाद का कागज था या धन आदेश। बूढ़े आदमी का चेहरा देखकर लगा कि उसे यकीन नहीं हो रहा। इतनी बड़ी मदद किसी ने नहीं की होगी। नायक ने बिना कुछ बोले कार में बैठकर चला गया। अब मेरी बारी है का यह कड़ी बहुत भावुक है। ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि अच्छाई की जीत होती है।
इस कार्यक्रम का चित्रण स्थल बहुत वास्तविक लग रहा था। गली में कचरा और गंदगी साफ दिख रही थी। इससे अमीर और गरीब का फर्क साफ पता चलता है। नायक का वस्त्र साफ सुथरा था और बूढ़े के कपड़े फटे हुए। यह विरोधाभास बहुत गहरा था। अब मेरी बारी है में ऐसे दृश्य बहुत अच्छे हैं। निर्देशक ने हर बारीकी पर ध्यान दिया है। देखने वाले को बंधा कर रखता है।
नायक ने ज्यादा संवाद नहीं बोले बस कार्यवाही की। उसकी खामोशी सबसे ज्यादा डरावनी थी। गुंडे शोर मचा रहे थे लेकिन नायक शांत था। जब उसने वार किया तो सब हैरान रह गए। बूढ़े आदमी को सहारा देना सबसे अच्छा लगा। अब मेरी बारी है में यह किरदार बहुत ताकतवर है। ऐसे नायक की हमें जरूरत है जो चुपचाप मदद करें। बहुत प्रेरणादायक दृश्य है।
जो गुंडा शुरू में बहुत बोल रहा था, अंत में वह जमीन पर गिरा हुआ था। उसके हाथ से खून बह रहा था और वह दर्द से कराह रहा था। उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था। नायक ने उसे वहीँ छोड़ दिया। यह न्याय बहुत कड़वा था लेकिन जरूरी था। अब मेरी बारी है का यह चरमोत्कर्ष बहुत दमदार है। ऐसे खलनायक को सबक सिखाना चाहिए।
अमीर व्यक्ति के पास सब कुछ था फिर भी उसने गरीब की मदद की। उसने कार से उतरकर खुद बूढ़े को उठाया। यह व्यवहार बहुत नेक था। उसने पत्र और कागज देकर उसकी जिंदगी बदल दी। अब मेरी बारी है में ऐसे किरदार देखकर अच्छा लगता है। पैसे से बड़ी इंसानियत होती है। यह दृश्य हमें यही सिखाता है। बहुत प्यारा लगा।
गली में पानी जमा था और बारिश का मौसम लग रहा था। इस माहौल में लड़ाई और भी डरावनी लग रही थी। नायक के जूते गंदे हो गए लेकिन उसने परवाह नहीं की। उसने बस सही किया। अब मेरी बारी है का यह दृश्य बहुत वातावरणीय है। छायांकन भी बहुत अच्छा था। हर बिंब में कहानी नज़र आ रही थी। देखने में बहुत मज़ा आया। यह दृश्य यादगार बन गया है।
दृश्यचित्र के अंत में बूढ़ा आदमी कागज देख रहा था और नायक चला गया। यह अंत बहुत उम्मीद भरा था। लगता है अब उस बूढ़े की जिंदगी बदल जाएगी। गुंडे को सबक मिल गया और अच्छाई जीत गई। अब मेरी बारी है की यह कहानी दिल को छू लेती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कार्यक्रम देखना सुकून देता है। सबको देखना चाहिए। यह मेरा पसंदीदा दृश्य है।
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