बारिश वाले दृश्य में जो ताकत दिखाई गई वो कमाल की थी। सी मिस्ट भोजनालय के बाहर खड़ा वो शख्स जैसे ही उठा, कहानी में नया मोड़ आ गया। अब मेरी बारी है देखकर लगा कि संघर्ष ही सफलता की चाबी है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा और संवाद दिल को छू गए। ऐसे नाटक बार बार देखने को मिलते नहीं हैं।
महिला किरदार की मजबूती देखकर दाद देनी पड़ती है। जब उसने कॉलर पकड़ा तो गुस्सा साफ झलक रहा था। व्यापार की जंग में उसने अपना लोहा मनवाया। अब मेरी बारी है की कहानी में ये पल सबसे यादगार बना। नेटशॉर्ट मंच पर दृश्य सामग्री की क्वालिटी भी बहुत अच्छी थी। बिल्कुल निराश नहीं किए।
पुरस्कार मिलने वाला दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। मेहनत का फल मीठा होता है ये लाइन यहाँ सच साबित हुई। शेफ की वर्दी में नायक का प्रवेश धांसू था। अब मेरी बारी है ने उम्मीदों पर खरा उतरा। खाने के शौकीनों के लिए ये श्रृंखला किसी दावत से कम नहीं लगती। बस देखते ही रहिए।
शुरुआत में जो तनाव था वो धीरे धीरे खुशी में बदल गया। रिबन काटने वाले दृश्य में सबकी मुस्कान देखकर मन खुश हो गया। साझेदारी की असली मिसाल है ये जोड़ी। अब मेरी बारी है में दिखाया गया सफर बहुत प्रेरणादायक है। छायांकन भी काबिले तारीफ रहा। हर चित्र सुंदर था।
कागजात बांटने वाले दृश्य में बहुत रहस्य था। सबको लगा अब क्या होगा पर अंत अच्छा हुआ। शहर के ऊपर उड़ते पेजों का दृश्य बहुत रचनात्मक था। अब मेरी बारी है की कथा थोड़ी जटिल पर समझने लायक है। निर्देशन में दम था। दर्शक को बांधे रखने की कला जानते हैं निर्माता।
रसोई के दृश्यों में जो सफाई और अनुशासन दिखा वो असली शेफ वाला अनुभव देता है। मांस काटने का तरीका भी पेशेवर लगा। अब मेरी बारी है ने भोजनालय की दुनिया को करीब से दिखाया। खाने की खुशबू पर्दे से आती लगी। ऐसी सामग्री के लिए नेटशॉर्ट श्रेष्ठ मंच है।
नायक और नायिका का मिलन देखते ही बनता है। बारिश में छाता लेकर चलना रोमांटिक लगा। दुश्मनों को करारा जवाब देने का तरीका भी शानदार था। अब मेरी बारी है में नाटक और भावना का सही संतुलन है। बोरियत का नाम नहीं लिया। छुट्टी के दिन देखने के लिए उत्कृष्ट है।
खलनायक किरदार की हार देखकर सुकून मिला। जो व्यक्ति जमीन पर गिरा था वो बाद में कैसे संभला ये देखना दिलचस्प था। अब मेरी बारी है की पटकथा में गहराई है। सिर्फ दिखावा नहीं बल्कि असली जज्बात दिखाए गए। कलाकारों ने अपने किरदार को जान डाल दी है। सबको सलाम।
शहर की ऊंची इमारतों के बीच ये कहानी बहुत जची। दृश्य प्रभावों ने कहानी को और निखारा। अब मेरी बारी है वाली अनुभूति हर कड़ी के बाद आती है। इसने छोटी कहानी में बड़ा असर छोड़ा। संगीत भी पृष्ठभूमि में माहौल बनाए रखता है। तकनीकी पक्ष भी मजबूत है।
अंत में जब सब कुछ ठीक हो गया तो राहत की सांस ली। संघर्ष के बाद मिली जीत सबसे मीठी होती है। सी मिस्ट का नाम अब मशहूर हो गया। अब मेरी बारी है देखकर प्रेरणा मिलती है। अपने सपनों के पीछे कैसे भागना है ये सीख मिलती है। ऐसे कार्यक्रम बार बार देखने चाहिए।
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