न्यायालय का वो सीन जब कैदी चिल्लाया था, रोंगटे खड़े कर देने वाला था। न्यायाधीश की शांति और उसका गुस्सा बिल्कुल विपरीत था। एब मेरी बारी है में ऐसे ड्रामे की उम्मीद नहीं थी। जेल की सलाखों के पीछे का अंधेरा और बीच की रोशनी का कंट्रास्ट बहुत गहरा है। देखकर लगता है कि हर गलती की कीमत चुकानी पड़ती है।
काले कोट वाला व्यक्ति कितना शांत था, जबकि सब कुछ हिल रहा था। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। एब मेरी बारी है की कहानी में ये किरदार सबसे रहस्यमयी लगता है। परिवार के साथ बीच पर बैठे उसका चेहरा देखकर लगता है जीत उसी की हुई है। सच्ची खुशी वही है जो परिवार के साथ हो।
जेल के अंधेरे कमरे में वो अकेला बैठा था, बिल्कुल टूट चुका था। हाथों में हथकड़ी और चेहरे पर निराशा साफ दिख रही थी। एब मेरी बारी है ने दिखाया कि इंसान कैसे एक पल में सब खो देता है। पुलिस वाले उसे घसीट रहे थे और वो बस देखता रहा। ये दृश्य दिल को झकझोर देता है।
बीच का वो नज़ारा देखकर मन शांत हो गया। पूरा परिवार एक साथ था, हाथों में हाथ डाले बैठे थे। एब मेरी बारी है में ये सुकून वाला पल बहुत जरूरी था। बच्चे को गोद में लेकर वो महिला कितनी खुश लग रही थी। जीवन में अंत में यही तो चाहिए होता है, अपनों का साथ और चैन।
न्यायाधीश की आवाज़ में वो वजन था जो पूरे न्यायालय में गूंज रहा था। सफेद विग और काला लिबास उनकी सत्ता को दर्शाता है। एब मेरी बारी है के इस सीन में कानून की गरिमा बरकरार थी। कैदी की हरकतों से कोई फर्क नहीं पड़ा, फैसला तो होना ही था। न्याय की राह कभी आसान नहीं होती।
दोस्तों के साथ बैठकर ये कार्यक्रम देखना सबसे अच्छा अनुभव है। हर कड़ी में नया मोड़ आता है। एब मेरी बारी है की कहानी हमें सोचने पर मजबूर कर देती है। कभी लगता है कि किस्मत कितनी तेजी से बदलती है। एक जेल में है तो दूसरा स्वर्ग में। ये विडंबना ही है।
उस व्यक्ति की मुस्कान देखकर लगता है कि उसने सब योजना बना रखी थी। न्यायालय से लेकर बीच तक का सफर आसान नहीं रहा होगा। एब मेरी बारी है में हर किरदार की अपनी कहानी है। बुजुर्ग दंपत्ति का आशीर्वाद भी उसके साथ था। परिवार का सहारा ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
कैदी की चीखें न्यायालय की दीवारों से टकरा रही थीं। पुलिस ने उसे पकड़ लिया था लेकिन उसका गुस्सा शांत नहीं हो रहा था। एब मेरी बारी है में ये तीव्र नाटक देखने लायक था। सजा मिलना तय था फिर भी वो लड़ता रहा। इंसान जब हार मान लेता है तो सब खत्म हो जाता है।
समुद्र की लहरें और हवा का शोर सब कुछ कितना सुंदर था। वहाँ बैठे हर चेहरे पर संतोष था। एब मेरी बारी है ने ये दिखाया कि सफलता का असली मतलब क्या है। पैसा नहीं, सुकून असली दौलत है। उस नवजात शिशु को देखकर लगता है नई शुरुआत हुई है।
अंत में वो जेल में अकेला था और ये सबसे दर्दनाक सीन था। दीवारों पर सन्नाटा चीख रहा था। एब मेरी बारी है का अंत हमें एक सबक दे जाता है। गलत रास्ते पर चलने का नतीजा हमेशा बुरा होता है। अच्छे कर्म ही इंसान को सही राह दिखाते हैं। ये कार्यक्रम जरूर देखें।
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