शुरुआत में वो डायरी क्यों छिपाई गई? लगता है कोई बहुत बड़ा राज़ दफ़न है उस काली तिजोरी में। बुजुर्ग दंपत्ती का अचानक आया गुस्सा देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। ऐसे में जब सब साथ छोड़ दें, तो बदले की आग ही बचती है। अब मेरी बारी है का इंतज़ार बस इसी पल का था। युवक की आँखों में दर्द नहीं, बल्कि एक अजीब सी जिद्द दिखी। जो शख़्स तिजोरी बंद कर रहा था, वही अब सबसे अकेला पड़ गया है। इस कहानी में हर मोड़ पर नया झटका लगता है।
घर की हालत देखकर लगता है जैसे किसी तूफ़ान ने सब कुछ तबाह कर दिया हो। कांच के टुकड़े और टूटा हुआ फर्नीचर कहानी का असली चेहरा दिखा रहे हैं। लाठी से बेरहमी से मारना कोई मज़ाक नहीं था। बुजुर्ग औरत की आँखों में नफ़रत साफ़ झलक रही थी। इस शो अब मेरी बारी है में हर सीन दिल दहला देता है। युवक को ज़मीन पर गिरा देखकर लगा कि शायद अब सब खत्म हो गया, पर कहानी अभी बाकी है। ऐसे ड्रामे ही असली मनोरंजन करते हैं।
बारिश में गिरा हुआ वो शख़्स अब उठेगा कैसे? कीचड़ में सने हाथ और चेहरे पर गहरी चोटें बता रही हैं कि रास्ता आसान नहीं होगा। सी मिस्ट बिल्डिंग को देखकर लगा कि उसकी नज़रें अब ऊपर हैं। बदला लेने का इरादा पक्का है। कहानी में जो उतार चढ़ाव है वो कमाल का है। वो ज़मीन पर गिरा था पर उसकी सोच ऊंची इमारतों पर थी। बारिश का पानी उसके जख्मों को धो रहा था पर इरादों को नहीं।
काग़ज़ के उस टुकड़े पर क्या लिखा था? शायद वही वजह थी इस सब झगड़े की। कानूनी पेंच हो या परिवार की साज़िश, हर कोई अपनी चाल चल रहा है। युवक को बाहर फेंकना कोई अंत नहीं, बस शुरुआत है। अब मेरी बारी है का टाइटल सही मायने में चरितार्थ हो रहा है। उस काग़ज़ पर दस्तखत किसी बड़े खेल की गवाही दे रहे थे। जो लोग हंसे थे, वही रोएंगे। ये कहानी बहुत गहरी है।
बुजुर्ग आदमी की चीखें अभी भी कानों में गूंज रही हैं। इतनी नफ़रत क्यों? क्या युवक ने कोई ग़लती की या वो बेगुनाह है? चेहरे पर खून और आँखों में सवाल लेकर वो बाहर निकला। इस ड्रामे में हर किरदार की परतें बहुत गहरी हैं। देखने वाला हैरान रह जाता है। उसकी आवाज़ में दर्द था और गुस्सा भी। परिवार के रिश्ते कितने जल्दी टूट जाते हैं। अब मेरी बारी है का जज़्बा यहीं से शुरू हुआ।
रात का वक़्त, टूटी खिड़कियां और बिखरी चीज़ें। माहौल इतना तनावपूर्ण है कि सांस लेना मुश्किल हो जाए। युवक की हालत देखकर तरस आया, पर उसकी आँखों में आंसू नहीं थे। बदले की आग जल रही थी। अब मेरी बारी है जैसे सीन दिल पर असर करते हैं। कमरे में बिखरा सामान बता रहा था कि झगड़ा कितना भयानक था। वो चुपचाप सब सह गया, पर बदला ज़रूर लेगा।
ऊंची इमारत को देखकर लगा कि वो वहीं वापस जाएगा। सी मिस्ट टावर शायद उसकी मंज़िल है। गिरकर संभलना और फिर ऊपर देखना, ये जज़्बा ही हीरो बनाता है। बारिश का पानी उसके जख्म धो रहा था पर इरादे नहीं। कहानी का मोड़ बहुत दिलचस्प है। उसकी आँखों में उस इमारत का प्रतिबिंब साफ़ दिख रहा था। वो हारा नहीं है, बस थोड़ा पीछे हटा है। जंग अभी बाकी है।
डायरी को तिजोरी में रखना और फिर वो हंगामा। सब कुछ पहले से प्लान लग रहा था। क्या वो युवक अंदरूनी साज़िश का शिकार हुआ? बुजुर्ग दंपत्ती का व्यवहार बहुत क्रूर था। अब मेरी बारी है में ऐसे ट्विस्ट देखने को मिलते हैं जो सोचने पर मजबूर कर दें। उसने खुद ही सब कुछ सुरक्षित रखा था, पर फिर भी सब छिन गया। किस्मत का खेल कुछ ऐसा ही होता है।
चेहरे पर चोटें और कपड़े गंदे, पर हौसला टूटा नहीं। जब वो कीचड़ से उठा तो लगा कि अब असली खेल शुरू होगा। बुजुर्ग औरत ने जो लाठी चलाई वो सिर्फ़ शरीर पर नहीं, रिश्तों पर भी लगी। इस शो का हर एपिसोड नया सस्पेंस लेकर आता है। उसके कपड़े मैले हो गए थे पर उसकी नीयत साफ़ थी। वो वापस आएगा और सबको जवाब देगा। ये कहानी रुकने वाली नहीं है।
अंत में वो नज़ारा जब वो इमारत को घूर रहा था। आँखों में प्रतिशोध साफ़ दिख रहा था। बारिश की बूंदें और शहर की रोशनी बैकग्राउंड में कमाल लग रही थी। अब मेरी बारी है का जज़्बा हर सीन में झलकता है। आगे क्या होगा ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। वो कीचड़ में था पर उसकी नज़रें सितारों पर थीं। ये संघर्ष की कहानी है जो हर किसी को छू लेती है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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