सम्राट के चेहरे पर गंभीरता और हाथों की मुट्ठी देखकर लगता है कि दरबार में कुछ बड़ा होने वाला है। लाल कालीन पर खड़े विदेशी दूतों की हिम्मत देखकर हैरानी होती है। बदला जो रूका नहीं की यह शुरुआत बहुत ही दमदार है, जहाँ हर पात्र की आँखों में एक अलग कहानी छिपी है। सम्राट का धैर्य अब कब टूटता है, यह देखना रोमांचक होगा।
ये तीनों विदेशी दूत इतने बेखौफ कैसे हो सकते हैं? सम्राट के सामने खड़े होकर भी इनके चेहरे पर डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी मुस्कान है। खासकर वो जो तलवार लेकर खड़ा है, उसकी आँखों में चालाकी साफ दिख रही है। बदला जो रूका नहीं में इन पात्रों का किरदार बहुत ही रहस्यमयी लग रहा है, जो आगे चलकर बड़ा धमाका करने वाला है।
रानी का चेहरा पर्दे से ढका है, लेकिन उनकी आँखों में छिपी बेचैनी साफ पढ़ी जा सकती है। वो सम्राट की प्रतिक्रिया को बारीकी से देख रही हैं। जब दरबार में इतना शोर हो रहा हो, तब उनकी खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। बदला जो रूका नहीं के इस दृश्य में रानी का किरदार बहुत गहराई से लिखा गया है, जो बिना बोले सब कह रहा है।
सम्राट के बगल में खड़ा सैनिकपति अपनी तलवार की मूठ को कसकर पकड़े हुए है। उसकी नज़रें सीधे उन विदेशियों पर टिकी हैं जो सम्राट को चुनौती दे रहे हैं। उसकी आँखों में क्रोध और वफादारी का मिश्रण है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य बताता है कि युद्ध सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि दरबार की चौखट पर भी लड़ा जाता है।
सम्राट का चेहरा पत्थर जैसा सख्त है, लेकिन उनकी आँखों में आग साफ दिख रही है। वे जानबूझकर शांत बैठे हैं, शायद ये सब एक योजना का हिस्सा है। जब वे अपनी मुट्ठी भींचते हैं, तो लगता है कि अब विस्फोट होने वाला है। बदला जो रूका नहीं में सम्राट का यह रूप देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, यह सत्ता का असली चेहरा है।