निकहिल गुप्ता के घर में शुरू हुआ ये सिलसिला देखकर रोंगटे खड़े हो गए। मास्क वाला शख्स इतनी बेरहमी से वार कर रहा है कि लगता है जैसे बदला जो रुका नहीं की कहानी का सबसे डार्क मोड़ आ गया हो। राजेश तिवारी और अलोक अग्रवाल की मौत के बाद अब सूर्य शर्मा की बारी है, पर वो इतना बेफिक्र कैसे रह सकता है? मास्क वाले की आँखों में जो ठंडक है वो किसी इंसान की नहीं लगती।
सूर्य शर्मा का किरदार मुझे सबसे ज्यादा हैरान कर रहा है। जब चारों तरफ मौत मंडरा रही हो और मास्क वाला कत्ल आम कर रहा हो, तब भी वो इतना शांत कैसे है? शायद उसे कुछ पता है जो हमें नहीं, या फिर वो अपनी मौत को गले लगा चुका है। सुमित शर्मा के नाम की किताब में क्या राज छिपे हैं जो इस खूनी सिलसिले की वजह बन रहे हैं? बदला जो रुका नहीं का ये मोड़ बहुत गहरा है।
मास्क वाले शख्स की हरकतें देखकर लगता है कि वो सिर्फ कत्ल नहीं कर रहा, बल्कि एक लिस्ट पूरी कर रहा है। निकहिल गुप्ता, राजेश तिवारी, अलोक अग्रवाल... सबके नाम उसकी किताब में दर्ज हैं। सूर्य शर्मा का नाम भी उसी लिस्ट में है, पर वो इतना शांत क्यों है? क्या वो मास्क वाले को जानता है? या फिर ये सब उसके इशारे पर हो रहा है? बदला जो रुका नहीं की ये पहेली सुलझती नहीं जा रही।
निकहिल गुप्ता के घर में शुरू हुई ये खूनी रात अब सूर्य शर्मा तक पहुँच चुकी है। मास्क वाला शख्स इतनी आसानी से सबको मार रहा है कि लगता है जैसे उसे किसी का डर नहीं। सूर्य शर्मा की तलवारबाजी देखकर लगा कि शायद वो बच जाएगा, पर मास्क वाले ने तो उसे भी नहीं छोड़ा। बदला जो रुका नहीं की ये कहानी अब किस मोड़ पर जाएगी? क्या सूर्य शर्मा की मौत के बाद ये सिलसिला रुकेगा?
मास्क वाले के हाथ में जो किताब है, वही इस पूरी कहानी की चाबी है। निकहिल गुप्ता, राजेश तिवारी, अलोक अग्रवाल... सबके नाम उसमें दर्ज हैं। सूर्य शर्मा और सुमित शर्मा के नाम भी उसी किताब में हैं। क्या ये किताब किसी पुराने बदले की निशानी है? या फिर ये किसी गुप्त संगठन की लिस्ट है? बदला जो रुका नहीं की ये पहेली अब और भी उलझती जा रही है।