इस दृश्य में बुजुर्ग व्यक्ति का क्रोध इतना तीव्र है कि सामने खड़े युवक की हंसी भी फीकी पड़ गई। बदला जो रूका नहीं में ऐसे संवाद बहुत गहराई से लिखे गए हैं। सुनहरी पोशाक वाली महिला की चुप्पी सब कुछ कह रही है। माहौल में तनाव साफ झलक रहा है।
जब बुजुर्ग चिल्ला रहे थे, तब भी सुनहरी पोशाक वाली महिला ने अपनी आंखों से जवाब दिया। बदला जो रूका नहीं की कहानी में पात्रों के बीच की खामोशी भी शोर मचाती है। उसकी आंखों में गुस्सा और ठहराव दोनों साफ दिख रहे थे।
नीली पोशाक वाला युवक बीच में हंस रहा था, जैसे उसे कुछ फर्क ही न पड़े। बदला जो रूका नहीं में ऐसे किरदार कहानी में हल्कापन लाते हैं। उसकी मुस्कान और हाथ में तलवार का संतुलन देखकर लगता है वह कुछ छिपा रहा है।
सफेद पोशाक और सुनहरा मास्क पहने योद्धा चुपचाप खड़ा था, जैसे किसी संकेत का इंतज़ार हो। बदला जो रूका नहीं में ऐसे पात्र हमेशा कहानी में मोड़ लाते हैं। उसकी मौजूदगी से दृश्य में एक अलग ही रहस्यमयी हवा चल रही थी।
गुलाबी साड़ी वाली महिला बीच में खड़ी थी, जैसे वह सब देख रही हो पर कुछ कह न पा रही हो। बदला जो रूका नहीं में ऐसे पात्र दर्शकों के दिल को छू लेते हैं। उसकी आंखों में चिंता और डर साफ झलक रहा था।