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Badla Jo Rooka Nahi

Surya Sharma ko jab pata chala ki Lata Verma ne uski maa Yogita ko maara, toh usne pandrah saal bigda hua beta banke apni jaan bachayi. Raja Yashwant Singh ne Yamini Singh ka Yuddh Vivaah rakha. Teen deshon ne Mahaagni ki izzat thukrayi. Sabne Surya ka mazaak udaya, lekin usne teen rajkumaron ko hara kar Yuddh Vivaah jeet liya. Lata Verma aur Sumit Sharma rooth gaye. Surya ne Raja se dosti ki aur Lokesh Verma se khud apni saazish khulwayi. Ant mein, Surya apni maa ka badla liya aur insaaf paaya.
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इस एपिसोड की समीक्षा

सोने की ईंटों का खेल

इस दृश्य में तनाव और लालच का मिश्रण बहुत अच्छे से दिखाया गया है। काले कपड़ों वाला व्यक्ति जब सोने की ईंटें दिखाता है, तो सामने वाले की आँखों में चमक साफ दिखती है। बदला जो रूका नहीं की कहानी में यह मोड़ बहुत रोमांचक है। कागज पर लिखी शर्तें पढ़कर उसका डरना स्वाभाविक था। अंत में जब वह सोना चखता है, तो लगता है कि लालच ने उसकी बुद्धि भ्रष्ट कर दी है। मास्क वाला व्यक्ति पीछे खड़ा होकर सब देख रहा था, जो आगे की कहानी के लिए एक बड़ा संकेत है।

लालच का अंजाम

जिस तरह से वह व्यक्ति सोने की ईंटों को देखकर खुश हो रहा था, वह देखकर ही समझ आ जाता है कि लालच इंसान को कैसे अंधा कर देता है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य बहुत गहराई से बनाया गया है। जब उसने कागज पढ़ा और उसका चेहरा उतर गया, तो पता चला कि यह कोई साधारण सौदा नहीं था। उसका बार-बार सोना चखना और फिर डर के मारे कांपना, यह सब अभिनय बहुत शानदार था। मास्क वाले व्यक्ति का अचानक प्रकट होना कहानी में नया मोड़ लाता है।

मास्क वाले का आगमन

पूरे दृश्य में जो सबसे ज्यादा डरावना और रहस्यमयी था, वह था मास्क वाला व्यक्ति। बदला जो रूका नहीं की कहानी में उसकी उपस्थिति बहुत महत्वपूर्ण लगती है। जब वह काले कपड़ों वाले व्यक्ति के पीछे खड़ा होता है, तो माहौल एकदम बदल जाता है। सोने की ईंटें और वह कागज शायद किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। उस व्यक्ति का सोना चखना और फिर डर जाना, यह सब बहुत ही नाटकीय था। यह दृश्य दर्शकों को अगले एपिसोड के लिए बेचैन कर देता है।

सौदे की शर्तें

इस वीडियो में दिखाया गया सौदा बहुत ही खतरनाक लग रहा था। बदला जो रूका नहीं में जब वह व्यक्ति कागज पढ़ता है, तो उसका चेहरा देखकर लगता है कि उसने कोई बहुत बड़ी गलती कर दी है। सोने की ईंटें लालच का प्रतीक हैं, लेकिन उसके बदले में उसे क्या करना होगा, यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। काले कपड़ों वाला व्यक्ति बहुत चालाक लग रहा था। अंत में मास्क वाले का आना इस बात का संकेत है कि यह खेल अभी खत्म नहीं हुआ है।

डर और लालच का खेल

इस दृश्य में डर और लालच के बीच की लड़ाई बहुत अच्छे से दिखाई गई है। बदला जो रूका नहीं की कहानी में यह मोड़ बहुत ही रोमांचक है। जब वह व्यक्ति सोने की ईंटों को देखकर खुश होता है, तो लगता है कि उसकी किस्मत बदल गई है। लेकिन जब वह कागज पढ़ता है, तो उसका चेहरा उतर जाता है। उसका सोना चखना और फिर डर के मारे कांपना, यह सब बहुत ही नाटकीय था। मास्क वाले व्यक्ति का आना इस बात का संकेत है कि यह सौदा आसान नहीं था।

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