जब सफेद पोशाक वाला युवक घुटनों पर गिर गया, तो लगा जैसे दिल भी टूट गया हो। उसकी आँखों में बेबसी और सामने खड़ी सुंदर महिला के चेहरे पर पत्थर जैसी ठंडक देखकर रोंगटे खड़े हो गए। बदला जो रूका नहीं में ऐसे दृश्य ही तो जान डालते हैं। काश वह महिला एक बार मुस्कुरा देती, पर शायद यही इस कहानी का दर्द है जो हमें बांधे रखता है।
एक आँख पर पट्टी बांधे वह योद्धा जब जमीन पर पड़े साथी के पास दौड़ा, तो उसकी वफादारी साफ झलक रही थी। गुलाबी पोशाक वाली लड़की के हाथ में खून से सना चाकू देखकर हैरानी हुई। बदला जो रूका नहीं का यह मोड़ बहुत तेज था। लगता है यह लड़की किसी बड़े बदले की आग में जल रही है, और यह आग सबको राख बना देगी।
सुनहरी पोशाक पहनी वह महिला किसी रानी से कम नहीं लग रही थी, पर उसके चेहरे का भाव बता रहा था कि वह किसी गहरे षड्यंत्र का हिस्सा है। जब उसने युवक को गिरा दिया, तो लगा जैसे उसने अपने ही दिल को ठुकरा दिया हो। बदला जो रूका नहीं में हर किरदार के पीछे एक राज छिपा है जो धीरे-धीरे खुल रहा है।
सफेद कपड़ों वाला वह शख्स जो कभी गर्व से चलता था, आज धूल में गिरा हुआ है। उसकी आँखों में आंसू और चेहरे पर हार साफ दिख रही थी। बदला जो रूका नहीं ने दिखाया कि कैसे प्यार इंसान को कितना नीचे गिरा सकता है। यह दृश्य देखकर मन भारी हो गया, क्योंकि हम सबने कभी न कभी ऐसा दर्द महसूस किया है।
जब वह चाकू जमीन पर गिरा और खून की बूंदें दिखाई दीं, तो लगा जैसे किसी की उम्मीदें टूट गई हों। गुलाबी पोशाक वाली लड़की की आँखों में नफरत और दर्द दोनों थे। बदला जो रूका नहीं का यह सीन बहुत ही इमोशनल था। लगता है यह कहानी सिर्फ बदले की नहीं, बल्कि टूटे हुए रिश्तों की भी है जो कभी जुड़ नहीं पाएंगे।