सम्राट के सामने जब सफेद पोशाक वाला युवक गिरता है, तो लगता है कि बदला जो रोका नहीं की कहानी अब नए मोड़ पर है। नीली पोशाक वाले का चेहरा देखकर साफ पता चलता है कि वह कुछ छिपा रहा है। दरबार की हवा में तनाव और उत्सुकता दोनों हैं।
लाल कालीन पर जब दोनों युवक भिड़ते हैं, तो बदला जो रोका नहीं का असली रंग सामने आता है। एक की चालाकी और दूसरे की ताकत का मुकाबला देखकर दिल धड़कने लगता है। सम्राट की चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी लग रही है।
पर्दे वाली रानी और गुलाबी पोशाक वाली दासी के चेहरे पर जो भाव हैं, वे बदला जो रोका नहीं के नाटकीय मोड़ को और भी गहरा बना देते हैं। उनकी आंखें सब कुछ देख रही हैं, पर कुछ नहीं कह रही हैं।
वह बैठे-बैठे सब कुछ नियंत्रित कर रहा है। बदला जो रोका नहीं में उसकी भूमिका सबसे रहस्यमयी लगती है। जब वह उंगली उठाता है, तो लगता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।
क्या वह नाटक कर रहा था या सच में कमजोर पड़ गया? बदला जो रोका नहीं के इस दृश्य में हर हरकत के पीछे कोई न कोई योजना जरूर है। उसकी आंखों में डर नहीं, चालाकी दिख रही थी।