सफेद पोशाक वाला योद्धा जब घोड़े से उतरा, तो लगा जैसे मौत खुद चलकर आई हो। उसकी आँखों में ठंडक थी, लेकिन हाथ में तलवार की पकड़ इतनी मजबूत कि दुश्मन भी डर गए। बदला जो रूका नहीं में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आसपास के लोग सांस भी नहीं ले रहे थे, बस उस एक पल का इंतजार कर रहे थे जब वह वार करेगा।
काले चमड़े की जैकेट और आंख पर पट्टी बांधे वह योद्धा पहले तो बहुत घमंडी लग रहा था, लेकिन जब सफेद पोशाक वाले ने अपनी तलवार निकाली, तो उसकी आंखें फैल गईं। बदला जो रूका नहीं में ऐसे मोड़ बहुत आते हैं जहां लगता है कि अब तो मार ही डालेगा। उसकी मुट्ठी भींचने का तरीका बता रहा था कि वह डर गया है, भले ही मुंह से कुछ न बोला हो।
वह महिला जो गुलाबी साड़ी में बैठी थी, उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था। बल्कि एक अजीब सी मुस्कान थी, जैसे वह सब कुछ जानती हो। बदला जो रूका नहीं में ऐसे किरदार बहुत गहरे होते हैं। जब उसने तलवार उठाई, तो लगा कि शायद वह भी कोई जादूगरनी है। उसकी आँखों में एक रहस्य था जो अभी तक खुला नहीं है।
नीले और बैंगनी रंग के कपड़े पहने वह युवक बहुत शांत लग रहा था, लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। बदला जो रूका नहीं में ऐसे किरदार अक्सर धोखा देते हैं। जब वह बोला, तो लगा जैसे वह सब कुछ नियंत्रित कर रहा हो। उसकी बातों में एक अजीब सा आत्मविश्वास था जो दूसरों को डरा रहा था।
जब घोड़े ने अपनी टापें जमीन पर मारीं, तो लगा जैसे युद्ध शुरू हो गया हो। सफेद पोशाक वाले की तलवार जब चमकी, तो सबकी सांसें रुक गईं। बदला जो रूका नहीं में ऐसे दृश्य बहुत ही रोमांचक होते हैं। उसकी तलवार की चमक इतनी तेज थी कि दुश्मन भी आंखें मूंद लेते थे। यह दृश्य किसी सपने जैसा लग रहा था।