जब चाँदनी रात में वो मुखौटा पहने शख्स छत पर खड़ा था, तो रोंगटे खड़े हो गए थे। लेकिन असली ड्रामा तो तब शुरू हुआ जब वो सुबह उठा और सब कुछ सामान्य लगा। बदला जो रूका नहीं में ये ट्विस्ट कमाल का है। क्या वो सपना था या कोई जादू? लड़की की आँखों में डर और हैरानी साफ दिख रही थी।
लाल रंग का इस्तेमाल सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि खतरे का संकेत लग रहा था। जब वो लड़की धीरे से बिस्तर के पास गई, तो लगा जैसे कोई बड़ा राज खुलने वाला है। बदला जो रूका नहीं का ये सीन दिल को छू गया। उसकी साँसें रुकी हुई थीं, और हमारी भी। क्या वो जाग जाएगा? या फिर कुछ और होगा?
रात के अंधेरे में चाँदनी के नीचे वो सफेद लिबास और चांदी का मुखौटा... बिल्कुल किसी भूतिया कहानी जैसा लगा। बदला जो रूका नहीं में ये किरदार बहुत रहस्यमयी है। क्या वो लड़की को बचाने आया था या कुछ और मकसद था? उसने जो फूल दिया, वो किसी यादगार की तरह लगा।
रात के डरावने मंजर के बाद सुबह का सीन बिल्कुल अलग था। लड़का मुस्कुरा रहा था, जैसे कुछ हुआ ही न हो। बदला जो रूका नहीं में ये विरोधाभास बहुत गहरा है। लड़की की आँखों में अभी भी वो रात का डर था, लेकिन वो कुछ कह नहीं पा रही थी। क्या वो सब भूल गया?
जब उसने उसकी उंगलियाँ छुईं, तो लगा जैसे समय थम गया हो। बदला जो रूका नहीं में ये छोटा सा पल बहुत बड़ा असर छोड़ गया। लड़की की साँसें तेज हो गईं, और लड़के की आँखों में एक अजीब सी चमक थी। क्या ये प्यार है या कोई और खेल?