सफेद पोशाक पहने युवक की आँखों में एक अलग ही चमक है। जब वह मैदान में उतरता है, तो लगता है जैसे बदला जो रूका नहीं की कहानी का असली नायक वही हो। उसकी मुट्ठी से निकलती सुनहरी रोशनी ने दुश्मन को हवा में उड़ा दिया। दर्शकों के चेहरे पर हैरानी देखकर मजा आ गया। यह दृश्य साबित करता है कि असली ताकत शरीर में नहीं, आत्मा में होती है।
सिंहासन पर बैठे राजा का रवैया शुरू में बहुत गंभीर था, लेकिन जब सफेद पोशाक वाले ने अपनी शक्ति दिखाई, तो उनकी आँखों में चमक आ गई। बदला जो रूका नहीं में ऐसे पल ही तो जान डालते हैं। लगता है राजा को अपने सही उत्तराधिकारी का पता चल गया है। उस बर्बर योद्धा की हार निश्चित थी, बस समय की बात थी।
लड़ाई का कोरियोग्राफी कमाल का था। एक तरफ हरी बिजली से लैस बर्बर, जो बहुत घमंडी लग रहा था, और दूसरी तरफ शांत खड़ा सफेद पोशाक वाला योद्धा। बदला जो रूका नहीं के इस एपिसोड में विजुअल इफेक्ट्स ने दिल जीत लिया। जब दोनों की शक्तियां टकराईं, तो स्क्रीन कांप उठी। अंत में उस योद्धा का दीवार से टकराना बहुत संतोषजनक लगा।
जब मैदान में जादूई बिजली कड़की, तो बैंगनी पोशाक पहने मंत्री की हालत देखने लायक थी। वह कुर्सी से उछल पड़ा था। बदला जो रूका नहीं में ऐसे किरदार ही कॉमेडी और ड्रामा का संतुलन बनाते हैं। उसे लगा शायद अब सब खत्म हो गया, लेकिन सफेद पोशाक वाले ने तो बस अपनी असली ताकत का परिचय दिया। उसकी घबराहट असली थी।
सुनहरे पर्दे वाले चेहरे वाली युवती ने पूरे दृश्य में एक शब्द नहीं बोला, लेकिन उसकी आँखें सब कुछ कह रही थीं। जब सफेद पोशाक वाले ने हमला किया, तो उसकी सांसें तेज हो गईं। बदला जो रूका नहीं में ऐसे रहस्यमयी पात्र कहानी को गहराई देते हैं। लगता है उसे इस युवक की शक्ति के बारे में पहले से कुछ संदेह था, या शायद वह उसके परिणाम से डर रही थी।