इस दृश्य में जो जंगली योद्धा दिखा, उसकी ताकत देखकर सबके होश उड़ गए। जब नीले वस्त्र वाला योद्धा उससे भिड़ा, तो पलक झपकते ही हार गया। बदला जो रुका नहीं में ऐसे एक्शन सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। राजा का चेहरा भी गंभीर हो गया, मानो उन्हें समझ आ गया हो कि यह कोई साधारण लड़ाई नहीं है।
सिंहासन पर बैठे राजा के चेहरे पर कोई भाव नहीं, लेकिन उनकी आँखों में चिंता साफ दिख रही थी। जब एक के बाद एक योद्धा हारते गए, तो दरबारियों की हंसी गंभीरता में बदल गई। बदला जो रुका नहीं की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है, जहाँ ताकत का असली मतलब समझ आता है। सफेद वस्त्र वाले युवक की प्रतिक्रिया भी देखने लायक थी।
नीले वस्त्र वाले योद्धा का आत्मविश्वास देखकर लगा कि वह जीत जाएगा, लेकिन जंगली योद्धा ने उसे हवा में उठाकर पटक दिया। यह दृश्य बदला जो रुका नहीं का सबसे रोमांचक पल था। दर्शकों की सांसें रुक गई थीं। उस योद्धा के मुंह से खून निकला, जो बताता है कि सामने वाला कितना खतरनाक है।
पहली हार के बाद भी जब सफेद वस्त्र वाला योद्धा आगे बढ़ा, तो लगा कि शायद वह कुछ कर पाए। लेकिन जंगली योद्धा ने उसे भी एक ही झटके में गिरा दिया। बदला जो रुका नहीं में यह दिखाता है कि गुस्से में लिया गया फैसला कितना महंगा पड़ सकता है। राजा की चुप्पी अब और भी भारी लग रही थी।
शुरुआत में जो दरबारी हंस रहे थे, अब उनकी हंसी गायब हो चुकी थी। बैंगनी वस्त्र वाले मंत्री का चेहरा पीला पड़ गया था। बदला जो रुका नहीं में यह दिखाता है कि जब असली खतरा सामने आता है, तो दिखावा टूट जाता है। राजा की आँखों में अब सिर्फ गंभीरता थी, कोई क्रोध नहीं, बस एक गहरी सोच।