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Badla Jo Rooka Nahi

Surya Sharma ko jab pata chala ki Lata Verma ne uski maa Yogita ko maara, toh usne pandrah saal bigda hua beta banke apni jaan bachayi. Raja Yashwant Singh ne Yamini Singh ka Yuddh Vivaah rakha. Teen deshon ne Mahaagni ki izzat thukrayi. Sabne Surya ka mazaak udaya, lekin usne teen rajkumaron ko hara kar Yuddh Vivaah jeet liya. Lata Verma aur Sumit Sharma rooth gaye. Surya ne Raja se dosti ki aur Lokesh Verma se khud apni saazish khulwayi. Ant mein, Surya apni maa ka badla liya aur insaaf paaya.
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इस एपिसोड की समीक्षा

राक्षस की ताकत के सामने सब फीके

इस दृश्य में जो जंगली योद्धा दिखा, उसकी ताकत देखकर सबके होश उड़ गए। जब नीले वस्त्र वाला योद्धा उससे भिड़ा, तो पलक झपकते ही हार गया। बदला जो रुका नहीं में ऐसे एक्शन सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। राजा का चेहरा भी गंभीर हो गया, मानो उन्हें समझ आ गया हो कि यह कोई साधारण लड़ाई नहीं है।

राजा की चुप्पी सब कुछ कह रही है

सिंहासन पर बैठे राजा के चेहरे पर कोई भाव नहीं, लेकिन उनकी आँखों में चिंता साफ दिख रही थी। जब एक के बाद एक योद्धा हारते गए, तो दरबारियों की हंसी गंभीरता में बदल गई। बदला जो रुका नहीं की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है, जहाँ ताकत का असली मतलब समझ आता है। सफेद वस्त्र वाले युवक की प्रतिक्रिया भी देखने लायक थी।

पहला हमला और पहली हार

नीले वस्त्र वाले योद्धा का आत्मविश्वास देखकर लगा कि वह जीत जाएगा, लेकिन जंगली योद्धा ने उसे हवा में उठाकर पटक दिया। यह दृश्य बदला जो रुका नहीं का सबसे रोमांचक पल था। दर्शकों की सांसें रुक गई थीं। उस योद्धा के मुंह से खून निकला, जो बताता है कि सामने वाला कितना खतरनाक है।

दूसरा चुनौती देने वाला भी ढेर

पहली हार के बाद भी जब सफेद वस्त्र वाला योद्धा आगे बढ़ा, तो लगा कि शायद वह कुछ कर पाए। लेकिन जंगली योद्धा ने उसे भी एक ही झटके में गिरा दिया। बदला जो रुका नहीं में यह दिखाता है कि गुस्से में लिया गया फैसला कितना महंगा पड़ सकता है। राजा की चुप्पी अब और भी भारी लग रही थी।

दरबारियों के चेहरे के भाव बदल गए

शुरुआत में जो दरबारी हंस रहे थे, अब उनकी हंसी गायब हो चुकी थी। बैंगनी वस्त्र वाले मंत्री का चेहरा पीला पड़ गया था। बदला जो रुका नहीं में यह दिखाता है कि जब असली खतरा सामने आता है, तो दिखावा टूट जाता है। राजा की आँखों में अब सिर्फ गंभीरता थी, कोई क्रोध नहीं, बस एक गहरी सोच।

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