सफेद पोशाक और सुनहरे मुखौटे वाला पात्र देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उसकी चुप्पी में कितना डर छिपा है, यह सोचकर ही दिल दहल जाता है। बदला जो रूका नहीं में ऐसे विलेन की एंट्री ने कहानी को एक नया मोड़ दे दिया है। जमीन पर घायल लोग और वह शांत खड़ा है, यह कंट्रास्ट कमाल का है।
हल्के हरे रंग की पोशाक में नायक का चेहरा देखकर लगता है जैसे वह किसी बड़े धोखे का शिकार हुआ हो। उसके हाथों पर खून के निशान और आंखों में बेबसी साफ झलक रही है। बदला जो रूका नहीं की इस कड़ी में संघर्ष का माहौल बहुत गहराई से दिखाया गया है। वह अकेला खड़ा है और सामने इतनी ताकतें हैं।
सुनहरी साड़ी पहने वह नायिका सिर्फ सुंदर ही नहीं, बल्कि बेहद ताकतवर भी लग रही हैं। जब उन्होंने जादुई शक्ति का प्रयोग किया, तो स्क्रीन पर चमक देखकर मजा आ गया। बदला जो रूका नहीं में महिला पात्रों को इतनी शक्तिशाली दिखाकर निर्माताओं ने सबका दिल जीत लिया है। उनका गुस्सा और फैसला लेने का तरीका शानदार है।
काले कपड़ों और आंख पर पट्टी बांधे वह योद्धा जमीन पर घुटनों के बल बैठा है, लेकिन उसकी पकड़ अभी भी मजबूत है। उसकी आंखों में हार नहीं, बल्कि बदले की आग साफ दिख रही है। बदला जो रूका नहीं के इस सीन में दर्द और जिद्द का जो मिश्रण है, वह लाजवाब है। वह हारा नहीं है, बस थोड़ा रुका है।
अंत में जब वह बूढ़े गुरु या पिता तुल्य पात्र की एंट्री होती है, तो माहौल में एक अलग ही गंभीरता आ जाती है। उनकी चाल और चेहरे के भाव बता रहे हैं कि अब खेल बदलने वाला है। बदला जो रूका नहीं में ऐसे अनुभवी पात्रों की जरूरत थी जो नायक को सही रास्ता दिखा सकें। उनकी मौजूदगी से भरोसा बढ़ता है।