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बादशाह का वह दृश्य जब वे सिंहासन पर बैठे हैं और अपनी आँखों से सब कुछ भांप रहे हैं, काशिश करने वालों के लिए डरावना है। उनकी पोशाक और ताज उनकी शान को बयां करते हैं। बदला जो रूका नहीं में बादशाह का किरदार इतना प्रभावशाली है कि हर कोई उनके सामने झुकने को मजबूर है। यह दृश्य सत्ता के असली चेहरे को दिखाता है।
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सफेद साड़ी पहने रानी का चेहरा देखकर लगता है कि वह कुछ छिपा रही है। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी है जो उसके दिल के दर्द को बयां करती है। बदला जो रूका नहीं में यह किरदार इतना रहस्यमयी है कि दर्शक उसके बारे में जानने के लिए बेताब हैं। उसकी हरकतें दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
दरबार का माहौल इतना तनावपूर्ण है कि हर कोई सांस रोके हुए है। शहज़ादे और बादशाह के बीच की दूरी देखकर लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। बदला जो रूका नहीं में यह दृश्य इतना रोमांचक है कि दर्शक अपनी सीट से उठ नहीं पाते। हर कोई इस नाटक का हिस्सा बनना चाहता है।