अस्पताल के सफेद गलियारे में जब वो शख्स ने सोफे पर गिरी चेन उठाई, तो लगा जैसे किसी बड़े राज का पर्दाफाश होने वाला हो। उस मरीज औरत के चेहरे पर उतरी घबराहट देखकर दिल दहल गया। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानी में भी इतना टेंशन नहीं था जितना इस सीन में है। वो चेन सिर्फ एक गहना नहीं, बल्कि किसी टूटे हुए रिश्ते की निशानी लग रही थी।
वो नन्ही परी जब दो सूट वाले शख्स के बीच खड़ी होकर सबको देख रही थी, तो उसकी मासूम आँखों में सवाल थे जो वयस्कों के दिमाग में नहीं थे। अस्पताल से लेकर विला तक का सफर भावनाओं का पहाड़ था। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले ड्रामे में बच्चे अक्सर सच्चाई के वाहक होते हैं, और यहाँ भी वो गुड़िया सब कुछ समझ रही है बस बोल नहीं रही।
लिविंग रूम का वो सीन जहाँ एक थप्पड़ ने सबकी नींद उड़ा दी, सच में रोंगटे खड़े करने वाला था। वो औरत जो सोफे पर बैठी थी, उसके चेहरे का रंग देखकर लगा जैसे दुनिया ही थम गई हो। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली सीरीज में भी इतनी ड्रामेबाजी नहीं मिलती। गुस्से में तमीज भूल जाना इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है, और यहाँ वो साफ दिख रहा था।
जब उस मरीज औरत ने वो चेन अपने हाथों में ली, तो उसकी आँखों से आँसुओं का सैलाब छूट पड़ा। वो सिर्फ रो नहीं रही थी, वो अपने बीते कल को याद करके टूट रही थी। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले प्लॉट में भी इमोशनल सीन ऐसे ही होते हैं जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं। उस शख्स का उसे गले लगाना बता रहा था कि वो अकेली नहीं है, पर दर्द तो अपना ही होता है।
दोनों शख्स जो काले सूट में थे, उनके चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता थी। अस्पताल के बाहर खड़े होकर वो किस बात पर बहस कर रहे थे, ये जानने की जिज्ञासा बढ़ रही थी। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में अक्सर बाहर वाले किरदार किसी बड़ी साजिश का हिस्सा होते हैं। लगता है ये लोग उस बच्ची और उस औरत के बीच की कड़ी हैं।