इस वीडियो में बाप बेटी का रिश्ता बहुत प्यारा लगा। जब बेटी ने खाना खाने से मना किया तो पिता ने तुरंत समझ लिया और उसे जबरदस्ती नहीं खिलाया। फिर जब नई महिलाएं आईं तो बेटी ने अपनी पसंद जाहिर की। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानी में भी बच्चों की भावनाओं को इतनी अहमियत नहीं दी जाती जितनी इस ड्रामे में दी गई है। पिता का बेटी के इशारे पर सब कुछ छोड़ देना सच्चे प्यार की मिसाल है।
काले कपड़े वाली महिला का व्यवहार शुरू से ही घमंडी लग रहा था। उसने बच्ची को तोहफा देने की कोशिश की लेकिन बच्ची ने उसे ठुकरा दिया। फिर जब उसने लाल लिफाफा देने की बात की तो पापा ने साफ मना कर दिया। यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि अमीर घराने में भी इज्जत कमाई जाती है, थोपी नहीं जाती। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले किरदारों की तरह यहाँ भी बच्ची की मासूमियत ने बड़ों की चालाकी को हरा दिया।
जब पापा ने बेटी को गोद में उठाया तो काले कपड़े वाली महिला के चेहरे का रंग बदल गया। उसे लगा शायद उसकी जगह खतरे में है। लेकिन असल में तो बस बेटी की पसंद मायने रखती है। सफेद कुर्ती वाली महिला बहुत शांत और विनम्र लगी, शायद इसलिए बच्ची ने उसे चुना। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली फिल्मों में जानवरों की भाषा समझना जादू होता है, यहाँ बच्ची की आँखें सब कुछ समझती हैं।
बूढ़े आदमी ने जब लाल लिफाफा निकाला तो लगा शायद कोई त्योहार है या कोई खास मौका। लेकिन फिर पता चला कि यह नई माँ को चुनने का हिस्सा है। काले कपड़े वाली महिला को लगा वह जीत गई है लेकिन बच्ची ने सफेद कुर्ती वाली का हाथ पकड़ लिया। यह पल बहुत इमोशनल था। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में भी बच्चे सही इंसान को पहचान लेते हैं, वैसे ही यहाँ भी हुआ।
इस वीडियो में सबसे अच्छी बात यह लगी कि पिता ने अपनी बेटी की खुशी को अपनी खुशी से ऊपर रखा। वह खुद कुछ नहीं बोले, बस बेटी के इशारे का इंतजार करते रहे। जब बेटी ने सफेद कुर्ती वाली को चुना तो उन्होंने तुरंत उसे स्वीकार कर लिया। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में हीरो अक्सर गलतियाँ करते हैं, लेकिन यहाँ पापा बिल्कुल सही रहे।