इस दृश्य में दादाजी का गुस्सा और बच्ची का डर बहुत ही असली लगता है। जब दादाजी चिल्लाते हैं तो लगता है कि घर में भूचाल आ गया हो। बच्ची की आँखों में जो डर है वो दिल को छू लेता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसीलिए वो पक्षियों की बात समझ पाती है क्योंकि उसका दिल अभी साफ़ है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना बहुत अच्छा लगता है।
खाने की मेज पर शुरू हुआ ये झगड़ा बहुत ही ड्रामेटिक है। दादाजी का व्यवहार थोड़ा सख्त जरूर है लेकिन शायद उनकी चिंता भी होगी। नौकर का फोन पर बात करना और फिर दादाजी का रिएक्शन देखकर लगता है कि कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, ये लाइन बार-बार दिमाग में आ रही है। सीन की एक्टिंग बहुत नेचुरल है।
अंत में जब दादाजी अपने फोन पर न्यूज देखते हैं और उनका चेहरा पीला पड़ जाता है, तो सस्पेंस अपने पीक पर होता है। शायद उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ हो या कोई बुरी खबर मिली हो। ये मोड़ बहुत ही शानदार है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, इस सीरीज का नाम भी बहुत यूनिक है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सस्पेंसफुल सीन्स का मजा ही कुछ और है।
जब बच्ची खाना खा रही थी और अचानक दादाजी चिल्लाए, तो उसका जो रिएक्शन था वो बहुत ही प्यारा और दर्दनाक था। उसने कुछ कहा नहीं बस चुपचाप सुनती रही। बच्चों पर ऐसे सीन्स का बहुत असर पड़ता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद वो पक्षियों से अपनी बात शेयर करती होगी। वीडियो की क्वालिटी और एक्टिंग दोनों ही बेहतरीन हैं।
बड़ा सा घर, महंगे सोफे और क्रिस्टल झूमर, सब कुछ बहुत शानदार है लेकिन अंदर का माहौल बहुत तनावपूर्ण है। दादाजी का गुस्सा और नौकर की घबराहट दिखाती है कि अमीरों की जिंदगी भी आसान नहीं होती। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, ये कहानी शायद यही बताना चाहती है कि असली खुशी पैसों में नहीं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे रियलिस्टिक ड्रामे देखने को मिलते हैं।