दो बच्चियों के बीच खिलौने को लेकर हुई नोकझोंक ने पूरे घर का माहौल बदल दिया। सफेद पोशाक वाली बच्ची का रोना और नीली शर्ट वाली की चुप्पी देखकर दिल दहल गया। वयस्कों की दौड़ और घबराहट ने दिखाया कि छोटी सी बात कितनी बड़ी बन सकती है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में भी शायद इतनी जटिल भावनाएं न हों जितनी इन इंसानों के चेहरों पर दिख रही हैं। हर किसी का डर और गुस्सा साफ झलक रहा है।
खाने के दौरान अचानक उठकर भागना और बच्चों के पास पहुंचना, यह सीन बहुत तनावपूर्ण था। सूट पहने व्यक्ति की चिंता और भूरे कोट वाले का गुस्सा देखकर लगता है कि मामला गंभीर है। सफेद खरगोश सिर्फ एक खिलौना नहीं, बल्कि किसी बड़े राज की चाबी लगता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले दृश्य में भी शायद जानवरों से ज्यादा इंसानों की भाषा समझना मुश्किल हो रहा है। माहौल में अजीब सी खामोशी छा गई है।
सफेद फ्रॉक वाली बच्ची के आंसू सिर्फ खिलौने के लिए नहीं हैं, ऐसा लगता है कि उसे किसी बात का गहरा दुख है। काली ड्रेस वाली महिला का उसे संभालना और बाकी लोगों की चिंतित नजरें कहानी में एक नया मोड़ लाती हैं। नीली शर्ट वाली बच्ची का शांत खड़ा रहना और भी सवाल खड़े करता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में शायद जानवरों की तरह सीधी बात होती, पर यहां सब कुछ उलझा हुआ है। हर चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी है।
चश्मे वाले व्यक्ति का व्यवहार सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था। खाने से उठकर सीधा बच्चों के पास जाना और नीली शर्ट वाली बच्ची को पकड़ना, इसमें कुछ छिपा है। उसकी आंखों में डर और हैरानी साफ दिख रही थी। भूरे कोट वाले का हस्तक्षेप और महिलाओं की प्रतिक्रिया ने माहौल को और गरम कर दिया। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाले सीन में शायद जानवर ज्यादा समझदार लगते हैं। यह परिवार किसी बड़ी मुसीबत में फंसा हुआ लगता है।
वो सफेद खरगोश साधारण खिलौना नहीं लग रहा। दोनों बच्चियों के बीच उसे लेकर जो खींचतान हुई, उसने सबकी नींदें उड़ा दीं। एक बच्ची रो रही है तो दूसरी चुपचाप सब देख रही है। वयस्कों की दौड़-भाग ने साबित कर दिया कि यह मामला साधारण नहीं है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा में शायद खरगोश ही सब कुछ समझा पा रहा हो। कमरे की खामोशी और चेहरों का तनाव देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।