गुलाबी पोशाक में वह छोटी लड़की जब बगीचे में दौड़ती है तो लगता है जैसे कोई परी उतर आई हो। उसकी मासूमियत और चिड़िया से बात करने का अंदाज दिल को छू लेता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, यह डायलॉग बिल्कुल सटीक बैठता है जब वह चींटियों को भी समझने की कोशिश करती है। दादाजी का गुस्सा और उसका डरना, दोनों के बीच का तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
व्हीलचेयर पर बैठे दादाजी का चेहरा देखकर ही लग जाता है कि आज माहौल खराब है। जब वह लड़की को डांटते हैं तो उसकी आंखों में जो डर झलकता है, वह किसी भी दर्शक का दिल पिघला देगा। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसीलिए वह जानवरों के पास जाती होगी जहां उसे सुकून मिलता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना एक अलग ही अनुभव है।
जब वह जमीन पर झुककर चींटियों को देखती है और उनसे बातें करती है, तो लगता है जैसे वह अपनी ही दुनिया में खो गई हो। यह सीन बच्चों की मासूमियत को बहुत खूबसूरती से दिखाता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, यह लाइन इस सीन के लिए बिल्कुल परफेक्ट है। दादाजी का रिएक्शन थोड़ा सख्त है लेकिन शायद वह उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
बड़े बंगले का बगीचा बहुत सुंदर है लेकिन वहां का माहौल थोड़ा गंभीर लग रहा है। दादाजी का व्यवहार बताता है कि घर में कुछ नियम बहुत सख्त हैं। लड़की का बार-बार गिरना और दादाजी का डांटना, यह डायनामिक बहुत इंटरेस्टिंग है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद वह इसीलिए पक्षियों और कीड़ों से दोस्ती करती है क्योंकि इंसानों से डर लगता है।
लड़की की मासूम हरकतें और दादाजी की सख्त डांट, यह कॉन्ट्रास्ट बहुत तेज है। जब वह रोने वाली होकर भी खुद को संभालती है, तो लगता है कि वह बहुत समझदार है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, यह कहानी बच्चों की दुनिया और बड़ों की दुनिया के बीच के फर्क को दिखाती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामे देखना बहुत पसंद आता है क्योंकि ये दिल के करीब होते हैं।