रोहन और उसकी नई पत्नी के बीच की केमिस्ट्री देखकर लगता है कि कुछ गड़बड़ है। बच्ची की मासूमियत और रोहन का उसे खिलाने का तरीका दिल को छू लेता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा जैसी कहानियों में अक्सर बच्चे ही सच्चाई को भांप लेते हैं, यहाँ भी वही हो रहा है। दादी और चाची की चुप्पी भी कुछ कह रही है।
लिविंग रूम में जब पूरा परिवार इकट्ठा होता है, तो माहौल में एक अजीब सी खिंचाव महसूस होता है। राकेश का आना और उसका व्यवहार साफ बता रहा है कि वह रोहन से जलता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानी की तरह, यहाँ भी बिना बोले सब कुछ समझा जा सकता है। हर किसी के चेहरे पर एक मुखौटा है।
इतनी छोटी उम्र में बच्ची जो कुछ समझ रही है, वह काबिले तारीफ है। रोहन का उसे समझाने का तरीका बहुत प्यारा है। लगता है कि वह बच्ची के दिल की बात पढ़ सकता है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा जैसी शक्तियाँ अगर किसी में हैं, तो वह इस बच्ची में हैं। उसकी आँखें सब कुछ बयां कर रही हैं।
लाल साड़ी वाली महिला के चेहरे पर जो नकली मुस्कान है, वह सब कुछ साफ कर देती है। वह बच्ची को अपना नहीं मानती। रोहन की मजबूरी साफ दिख रही है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा वाली कहानियों में अक्सर सौतेली माँ विलेन होती है, यहाँ भी वही लग रहा है। बच्ची बेचारी कितनी अकेली है।
राकेश के आते ही माहौल बदल गया। उसकी आँखों में चालाकी और ईर्ष्या साफ दिख रही है। वह रोहन को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ेगा। छोटी परी जो समझे पशु भाषा जैसी कहानियों में अक्सर एक विलेन होता है जो परिवार को तोड़ने की कोशिश करता है। राकेश वही किरदार निभा रहा है।