अस्पताल के कमरे में दादाजी की आंखों में छिपा दर्द और नाती की मासूमियत देखकर दिल पिघल गया। जब वो जहरीली रिपोर्ट पढ़ते हैं, तो चेहरे पर हैरानी और फिर मुस्कान आती है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसी रिश्ते की गहराई को समझती है। बच्ची की बातें सुनकर बुजुर्ग का हंसना सबसे खूबसूरत पल था।
जैसे ही वो चश्मे वाला नौजवान कमरे में आया, माहौल बदल गया। दादाजी का गुस्सा और बच्ची की हैरानी देखकर लगता है कोई बड़ा राज खुलने वाला है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इन तीनों के बीच के तनाव को महसूस कर रही है। ड्रामा अब अपने चरम पर है, अगला सीन कितना धमाकेदार होगा!
वो कागज जिस पर दादाजी की नजर गई, वो सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट नहीं, बल्कि परिवार के किसी बड़े झूठ का सबूत लग रहा था। बच्ची का मासूम चेहरा और बुजुर्ग का गुस्सा देखकर लगता है कहानी में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इस सच को सबसे पहले समझ जाएगी।
इस सीन में सबसे प्यारा पल वो था जब बच्ची दादाजी को हंसाने की कोशिश कर रही थी। वहीं दूसरी तरफ सूट वाले लोग किसी साजिश में लगे हुए हैं। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इसी मासूमियत की ताकत को दर्शाती है। बड़ों की दुनिया की चालाकी और बच्चों की दुनिया की सच्चाई का ये टकराव दिलचस्प है।
शुरुआत में शांत अस्पताल का कमरा अब तनाव से भर गया है। दादाजी का बिस्तर से उठकर गुस्सा करना और सूट वाले शख्स का ठंडा मिजाज देखकर लगता है कोई बड़ी लड़ाई होने वाली है। छोटी परी जो समझे पशु भाषा, शायद इस तनाव को कम करने का रास्ता निकालेगी। हर किरदार का एक्सप्रेशन कहानी कह रहा है।