जब छोटी परी जो समझे पशु भाषा ने टैबलेट पर न्यूज़ देखा, तो उसके चेहरे पर जो उत्साह था, वो देखकर दिल पिघल गया। फिर जब उसके माता-पिता आए, तो उसकी खुशी दोगुनी हो गई। लेकिन जब दो अजनबी आदमी आए, तो उसकी आँखों में डर झलकने लगा। यह दृश्य इतना भावनात्मक था कि मैं भी रो पड़ी। बच्ची का अभिनय लाजवाब है, हर एक्सप्रेशन दिल को छू जाता है।
लक्जरी घर के अंदर का दृश्य बहुत खूबसूरत है, लेकिन जब दो सूट पहने आदमी आए, तो हवा में तनाव छा गया। छोटी परी जो समझे पशु भाषा की आँखों में जो सवाल थे, वो बिना बोले सब कह रहे थे। माँ का चेहरा फीका पड़ गया, पिता की आवाज़ कांपने लगी। यह दृश्य इतना रियलिस्टिक था कि लगा मैं भी उस कमरे में खड़ी हूं। डायरेक्शन और एक्टिंग दोनों बेमिसाल हैं।
जब उस आदमी ने फाइल निकाली और पिता ने उसे देखा, तो छोटी परी जो समझे पशु भाषा की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। ऐसा लगा जैसे वह सब कुछ समझ गई हो, भले ही वह बच्ची है। उसकी मासूमियत के पीछे छिपी समझदारी देखकर हैरानी हुई। यह दृश्य इतना गहरा था कि मैंने दो बार देखा। बच्ची का किरदार इतना जटिल और सुंदर है कि दिल से उतरता ही नहीं।
जब माँ ने उस फाइल को देखा, तो उसके हाथ कांपने लगे। छोटी परी जो समझे पशु भाषा ने तुरंत उसका हाथ थाम लिया। यह छोटा सा एक्शन इतना भावनात्मक था कि मैं रो पड़ी। बच्ची ने माँ को सहारा दिया, भले ही वह खुद डरी हुई थी। यह रिश्ता इतना सच्चा और गहरा है कि देखकर लगता है जैसे यह हमारे अपने घर की कहानी हो। अभिनय में जान है।
जब वह आदमी सफेद सूट में आया, तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता थी। छोटी परी जो समझे पशु भाषा ने उसे देखकर जो प्रतिक्रिया दी, वो बहुत ही सूक्ष्म थी। ऐसा लगा जैसे वह जानती हो कि यह आदमी क्यों आया है। यह दृश्य इतना टेंशन से भरा था कि सांस रुक गई। डायलॉग नहीं थे, लेकिन आँखों की बातचीत सब कुछ कह गई। यह शॉर्ट फिल्म का सबसे बेहतरीन मोड़ है।