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जब तक फूल न झर जाएँवां1एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बारिश में टूटा दिल और बाद में मिला प्यार

जब तक फूल न झर जाएँ की शुरुआत ही दिल दहला देने वाली है। बारिश में भीगती लड़की और उसकी आँखों का दर्द देखकर रूह कांप गई। फिर वो राजकुमार जो अपने प्यार को खोकर पागल सा हो गया, उसका गुस्सा और टूटना बहुत असली लगा। जब वो कंगन देखकर यादों में खो जाता है, तो लगता है जैसे हर किसी की कहानी में ऐसा एक पल आता है। बाद में गरीब लड़की और बच्चों का दृश्य देखकर लगा कि जिंदगी कितनी बेरहम हो सकती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना एक अलग ही अनुभव है।