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जब तक फूल न झर जाएँवां18एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गरीब माँ की चीख और अमीर लड़की की बेरुखी

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य दिल दहला देता है। गंदे कपड़ों वाली माँ अपने बच्चों के लिए गिड़गिड़ाती है, जबकि नीले लिबास वाली लड़की पत्थर दिल बनकर देखती रहती है। बच्चों की रोने की आवाज़ और माँ की बेबसी किसी को भी रुला सकती है। फिर वह चित्रकार जो पेंटिंग बना रहा है, शायद यही माँ उसकी प्रेरणा है? नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल मोमेंट्स देखकर लगता है कि कहानी में बहुत गहराई है।