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जब तक फूल न झर जाएँवां4एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्चे की आँखों में छुपा राज

जब तक फूल न झर जाएँ में यह दृश्य दिल को छू लेता है। एक गरीब बच्चा, जिसके कपड़े फटे हैं, वह एक कीमती पिन छुपाए हुए है। जब वह उसे वापस करता है, तो उसकी आँखों में डर और शर्म दोनों झलकते हैं। फिर अचानक एक छोटी लड़की दौड़कर आती है और उस राजकुमार के पैर पकड़ लेती है, जैसे कोई आखिरी उम्मीद बाकी हो। तलवार निकलते ही माहौल तनाव से भर जाता है। बच्चों के बीच का यह संघर्ष और वयस्कों की प्रतिक्रियाएँ बहुत गहरी हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे भावुक क्षण देखना हमेशा खास लगता है।