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जब तक फूल न झर जाएँवां5एपिसोड

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जब तक फूल न झर जाएँ

सात साल पहले, सम्राट आदित्य ने अपनी प्रिय काव्या को खो दिया। बरसी के दिन भेष बदलकर हरिपुर जाने पर उसे अंधी काव्या और उसके जुड़वां बच्चों का पता चलता है। सच सामने आता है कि राजमाता ने उसे महल से निकलवाया था। साजिशों और हमलों के बीच, सान्या काव्या को फंसाने की कोशिश करती है, लेकिन राजमाता सच्चाई जानकर पीछे हटती है। अंत में आदित्य और काव्या मिल जाते हैं और परिवार एक हो जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजा का दिल पसीज गया

जब तक फूल न झर जाएँ में राजा की आँखों में छिपा दर्द देखकर रूह काँप गई। गंदे कपड़ों वाले बच्चे की चीखें और राजा का चुपचाप खड़ा रहना—ये दृश्य दिल को चीर देते हैं। वो तलवार नहीं, बल्कि अपनी मजबूरी पकड़े हुए हैं। जब बच्ची गिरकर रोती है, तो लगता है जैसे पूरा राज्य रो रहा हो। नेटशॉर्ट पर ऐसे भावुक दृश्य देखना अलग ही अनुभव है।