जब प्रोफेसर आइवी ऑपरेशन थिएटर से बाहर आती हैं, तो उनकी आँखों में एक अलग ही चमक होती है। सीनियर डॉक्टर उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे थे। सिंघानिया ग्रुप जैसी बड़ी ऑफर ठुकराकर उन्होंने मरीज की देखभाल चुनी। यह समर्पण देखकर दिल खुश हो गया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे पल बार बार देखने को मिलते हैं। असली हीरो वो होते हैं जो जान बचाते हैं।
सूट पहने उस शख्स की बातें सुनकर हैरानी हुई। वो मिस वर्मा को ढूंढ रहे हैं और आइवी वाले मामले को निपटाना चाहते हैं। लगता है कहानी में बहुत बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। उसकी आँखों में एक अजीब सी जिद साफ दिख रही थी। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सस्पेंस भरे सीन बहुत पसंद आए। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का यह मोड़ बहुत रोमांचक है।
आइवी ने साफ कह दिया कि वो किसी संस्था में नहीं बंधना चाहतीं। उन्हें आज़ादी से काम करना पसंद है। आज के दौर में ऐसा फैसला लेना आसान नहीं होता। उनकी इस बात ने मुझे बहुत प्रभावित किया। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की कहानी में यह किरदार बहुत मजबूत लग रहा है। महिला सशक्तिकरण का सही उदाहरण है यह। स्वतंत्रता का जश्न है यह।
अचानक जब वो पुराना सीन आया जहाँ लोग कन्फेटी फेंक रहे थे और सोनम को बधाई दे रहे थे, तो लगा कहानी पीछे जुड़ी है। शायद आइवी और उस जश्न का कोई कनेक्शन है। ये फ्लैशबैक सीन बहुत अच्छे से एडिट किए गए हैं। दर्शक को कन्फ्यूज भी करते हैं और उत्सुक भी। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में टाइमलाइन का खेल बहुत अच्छा है।
व्हाइट कोट वाले डॉक्टर ने आइवी के हाथ थामकर उनका शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मल्होत्रा साहब की जान बचाई है। यह सम्मान देखकर अच्छा लगा। मेडिकल फील्ड में टीम वर्क कितना जरूरी है, यह सीन बताता है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में रिश्तों की अहमियत को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। सहयोग की मिसाल है।
लिफ्ट में खड़ा वो शख्स कह रहा था कि वो आइवी को वापस अपने पास खींच लाएगा। यह सुनकर लगता है कि दोनों के बीच कोई पुराना नाता है। क्या वो मिस वर्मा ही हैं जो छिपी हुई हैं? कहानी में कई सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे ड्रामा देखने का मजा ही अलग है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में हर सीन में कुछ नया खुलता है। रहस्य बना हुआ है।
अस्पताल के कॉरिडोर और ऑपरेशन थिएटर का माहौल बहुत असली लगा। हरे रंग के स्क्रब्स और मास्क में सब कुछ प्रोफेशनल लग रहा था। जब आइवी चलकर बाहर आईं, तो राहत की सांस लेने का अंदाज बहुत नेचुरल था। सेट डिजाइन और लाइटिंग पर खासी मेहनत की गई है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की प्रोडक्शन क्वालिटी काफी अच्छी है। दृश्य रूप से भी शानदार है।
आइवी ने मल्होत्रा साहब की रिकवरी थेरेपी खुद करने की जिद की। यह दिखाता है कि वो अपनी जिम्मेदारी से भागती नहीं हैं। सिर्फ ऑपरेशन करना काफी नहीं, बाद की देखभाल भी जरूरी है। यह संदेश समाज के लिए बहुत अच्छा है। डॉक्टरों के प्रति सम्मान और बढ़ जाता है ऐसे सीन देखकर। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में मानवता की झलक मिलती है।
डायलॉग बहुत ही दमदार थे। खासकर जब डॉक्टर ने कहा कि टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट इंतजार कर रहे हैं। और आइवी का जवाब कि वो फिलहाल किसी संस्था में नहीं जाना चाहतीं। यह संवाद किरदार की पर्सनालिटी को परिभाषित करता है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में डायलॉग बाजी बहुत तेज है। एक्टर्स ने भी बहुत अच्छा निभाया। शानदार प्रदर्शन है।
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि आइवी और सूट वाले शख्स का क्या कनेक्शन है। मिस वर्मा कौन हैं और वो क्यों छिपी हुई हैं? अगले एपिसोड का इंतजार नहीं हो रहा है। कहानी में जो ट्विस्ट आए हैं वो बहुत अनोखे हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट मिलना सुखद है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में आगे और भी रोमांचक मोड़ आएंगे। उम्मीदें बढ़ गई हैं।