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(डबिंग) तुम थे मेरी कायनातवां3एपिसोड

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(डबिंग) तुम थे मेरी कायनात

नैना वर्मा, सिंघानिया के ड्राइवर की बेटी, सात साल अद्वैत से प्रेम किया। एक रात वह उसकी गुप्त प्रेमिका बनी, दो साल सेवा की। सोनम के लौटते ही ठुकराई गई, शोध चुराया गया, सीढ़ियों से गिरा दिए जाने पर भी थप्पड़ खाया। टूटकर विदेश चली गई। तीन साल बाद नोबेल विजेता प्रोफ़ेसर आइवी बनकर लौटी। पछताता अद्वैत उसे ढूँढता है, पर वह कबीर मल्होत्रा के साथ नया जीवन जी रही है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

नैना का त्याग

नैना का फैसला दिल को छू लेता है। वह अद्वैत से बिना मिले देश छोड़ रही है। खत को कचरे में फेंकते वक्त उसकी आंखों में दर्द साफ दिखता है। क्या सच्चा प्यार हमेशा अधूरा रहता है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात ने इस दर्द को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। मुझे लगता है नैना को जाना ही था पर अद्वैत को सच जानना चाहिए था।

अद्वैत की हैरानी

अद्वैत को जब पता चला कि नैना सुबह ही बस से चली गई, तो उसके चेहरे के भाव देखने लायक थे। वह कॉलेज साथ जाने की बात कर रहा था और वह जा चुकी थी। यह गलतफहमी कहानी को आगे बढ़ाती है। काश वह एक बार फोन उठा लेती। समय की मार बहुत कड़ी होती है।

लॉकर का दृश्य

स्कूल के लॉकर वाला दृश्य बहुत भावुक है। नैना अपनी पुरानी चीजें साफ कर रही है जैसे अपने प्यार को मिटा रही हो। खत में लिखा था कि वह उसे प्यार करती है पर उसे देने की हिम्मत नहीं हुई। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की कहानी में यह पल सबसे भारी है। हर शब्द में दर्द था।

झूठ और चुप्पी

नौकरानी ने पूछा था कि क्या वह साहबजादे का इंतजार नहीं करेगी। नैना ने झूठ बोल दिया कि वह सो जाएगी। असल में वह अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला ले रही थी। इस चुप्पी ने दोनों को तोड़ दिया। अद्वैत अब भी समझ नहीं पा रहा है। क्यों नहीं बताया उसने।

लंच बॉक्स की याद

अद्वैत के फोन पर बात करने का अंदाज बहुत प्यारा था। वह सोनम को लेने जा रहा था पर शायद वह नैना को ढूंढ रहा था। जब उसे लंच बॉक्स याद आती है तो उसे अहसास होता है। नैना रोज बनाती थी। अब वह नहीं है। यह खालीपन महसूस होता है।

सफेद कपड़े और मजबूरी

नैना के सफेद कपड़े उसकी मासूमियत को दिखाते हैं। वह खतरनाक काम के लिए जा रही है जहां संपर्क तोड़ना होगा। यह खतरनाक है पर वह डटी हुई है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में किरदारों की मजबूरी साफ झलकती है। देखकर लगता है प्यार से बड़ी जिम्मेदारी है। देश के लिए त्याग करना आसान नहीं होता।

सवाल और तनाव

अद्वैत जब लॉकर के पास नैना को देखता है तो हैरान रह जाता है। वह पूछता है सामान क्यों समेट रही हो। इस सवाल में पूरी कहानी छिपी है। क्या वह उसे जाने देगा या रोक लेगा। यह तनाव बना रहता है। अंत क्या होगा यह जानना जरूरी है।

खत का दर्द

खत को पढ़ते वक्त नैना की आवाज कांप रही थी। उसने लिखा था कि पढ़ाई के बाद दूंगी पर अब जरूरत नहीं। यह मानना कि अब सब खत्म है बहुत मुश्किल है। अद्वैत को सच बताना चाहिए था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का चरमोत्कर्ष दिल दहला देता है। रुला देने वाला दृश्य है।

कहानी की रफ्तार

कहानी की रफ्तार बहुत सही है। न तो बहुत तेज न बहुत धीमी। हर दृश्य में एक नया मोड़ है। घर से लेकर स्कूल तक का सफर नैना की मानसिक स्थिति को बताता है। अद्वैत का आगमन लेट होता है पर असरदार है। निर्देशन बहुत शानदार है।

उम्मीद की किरण

अंत में नैना खत को वापस बैग में रख लेती है। शायद उसे उम्मीद है कि वह लौटेगी। अद्वैत का खड़ा होना यह बताता है कि वह पीछा करेगा। यह रोमांस और ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण है। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात जरूर देखें। दिल को छू लेती है।