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(डबिंग) तुम थे मेरी कायनातवां43एपिसोड

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(डबिंग) तुम थे मेरी कायनात

नैना वर्मा, सिंघानिया के ड्राइवर की बेटी, सात साल अद्वैत से प्रेम किया। एक रात वह उसकी गुप्त प्रेमिका बनी, दो साल सेवा की। सोनम के लौटते ही ठुकराई गई, शोध चुराया गया, सीढ़ियों से गिरा दिए जाने पर भी थप्पड़ खाया। टूटकर विदेश चली गई। तीन साल बाद नोबेल विजेता प्रोफ़ेसर आइवी बनकर लौटी। पछताता अद्वैत उसे ढूँढता है, पर वह कबीर मल्होत्रा के साथ नया जीवन जी रही है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

लेक्चर हॉल में फिर मुलाकात

प्रोफेसर आई वेई का लेक्चर देखकर लग रहा था कि सब कुछ सामान्य है, लेकिन जब वो बीगे सूट वाला शख्स आया, तो हवा बदल गई। उनकी आँखों में पुरानी कहानी छिपी थी। नेटशॉर्ट ऐप पर (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात देखते वक्त लगा कि ये सिर्फ लेक्चर नहीं, किसी अधूरे रिश्ते की शुरुआत है। चेहरे के भाव सब कुछ बता रहे थे। बहुत ही खूबसूरत तरीके से ये दृश्य फिल्माया गया है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

बदलते कपड़े और नहीं बदला रिश्ता

लेक्चर के बाद जब प्रोफेसर आई वेई ड्रेसिंग रूम गई, तो वहां वो इंतज़ार कर रहा था। उसने कहा काफ़ी समय हो गया, पर नज़रें वही पुरानी थीं। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की ये कहानी दिल को छू गई। मल्होत्रा साहब से फोन पर बात करते हुए उसकी घबराहट साफ़ दिख रही थी। क्या वो फिर से शुरू करेंगे? ये सवाल हर दर्शक के मन में उठ रहा है। कहानी में गहराई है।

सस्पेंस से भरी एंट्री

बीच लेक्चर में उसकी एंट्री ने सबका ध्यान खींच लिया। प्रोफेसर आई वेई ने खुद को संभाला, पर दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे मोड़ आते हैं जो सांस रोक दें। वो चुपचाप पीछे बैठ गया, पर उसकी मौजूदगी शोर मचा रही थी। क्लासिक रोमांस का बेहतरीन नमूना है ये। हर फ्रेम में एक अलग ही जादू है जो दर्शकों को पसंद आएगा।

फोन कॉल का राज़

लेक्चर खत्म होते ही मल्होत्रा साहब का फोन आया। प्रोफेसर आई वेई ने कहा वो कपड़े बदलकर बाहर आएगी। पर वो तो अंदर ही इंतज़ार कर रहा था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की पटकथा में ये ट्विस्ट बहुत गहरा था। क्या वो जानबूझकर वहां रुका था? हर पल नया सवाल खड़ा कर रहा है। इस शो की लोकप्रियता बढ़ रही है। कहानी बहुत रोचक है।

आँखों की जुबानी

शब्दों की ज़रूरत ही नहीं पड़ी जब उनकी नज़रें मिलीं। प्रोफेसर आई वेई की स्पीच के बीच वो बस देखता रहा। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में ऐसे सीन्स हैं जो बिना डायलॉग के कहानी कह देते हैं। उसकी पुरानी आदतें नहीं गईं, ये डायलॉग दिल पर वार कर गया। बहुत खूबसूरत अंदाज़ है बयान करने का। एक्टिंग बहुत नेचुरल लग रही है।

ड्रेसिंग रूम वाला ट्विस्ट

सबको लगा वो चली गई, पर वो तो बस कपड़े बदलने गई थी। और वहां उसका इंतज़ार कर रहा था वो शख्स। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात का ये सीन सबसे ज्यादा तनावपूर्ण था। प्रोफेसर आई वेई हैरान रह गईं। क्या ये मुलाकात इत्तेफाक थी या प्लानिंग? जानने के लिए और देखना पड़ेगा। सस्पेंस बना हुआ है।

लेक्चर या बहाना?

बायोसेरिन और इम्यून सिस्टम पर लेक्चर तो बहाना लग रहा था। असली मकसद तो शायद ये मिलना था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में हर डायलॉग के पीछे छिपा मतलब है। प्रोफेसर आई वेई की घबराहट साफ़ दिख रही थी जब उसने पूछा तुम यहाँ क्यों आए हो। बहुत गहराई है इस कहानी में। हर एपिसोड नया खुलासा करता है।

पुरानी आदतें

उसने कहा कि सोचते वक्त भी उसकी पुरानी आदतें नहीं गईं। ये लाइन सीधे दिल में उतर गई। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात की ये डायलॉग डिलीवरी लाजवाब थी। प्रोफेसर आई वेई और वो शख्स दोनों ही अपने किरदार में जान डाल रहे हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट मिलना दुर्लभ है। बहुत पसंद आ रहा है ये सीरीज़।

इंतज़ार की घड़ियां

वो लेक्चर खत्म होने का इंतज़ार कर रहा था, बिल्कुल वैसे ही जैसे पुराने ज़माने में लोग करते थे। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात में वक्त का अहसास बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। प्रोफेसर आई वेई के चेहरे पर हैरानी और खुशी दोनों थी। ये कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, ये देखना बाकी है। बहुत उत्सुकता है।

अधूरी कहानी का आगाज़

लेक्चर हॉल से लेकर ड्रेसिंग रूम तक का सफर बहुत रोमांचक था। (डबिंग) तुम थे मेरी कायनात ने फिर से साबित कर दिया कि वो बेहतरीन कहानियां सुनाता है। प्रोफेसर आई वेई का किरदार बहुत मज़बूत है। मल्होत्रा साहब से बातचीत के बाद का ये दृश्य बहुत अहम था। अब आगे क्या होगा? जानने की बेताबी है।